केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया कांग्रेस पर तीखा हमला
मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी पर जमकर बरसे शिवराज सिंह चौहान
सोशल मीडिया पर कांग्रेस की चिट्ठी- झूठ और फरेब का प्रमाण हैं- शिवराज सिंह
Sandhyamidday@Newdelhi@ केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को कांग्रेस पर सियासी निशाना साधा। मीडिया से उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने अपना आइडिया, आइडियोलॉजी और आइडियल तीनों छोड़ दिए हैं। कांग्रेस झूठ की दुकान और फरेब की फैक्ट्री चला रही है, देश को भ्रमित करने का काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि कहा जा रहा है कि मनरेगा की आत्मा नष्ट कर दी गई, जबकि सच यह है कि कांग्रेस ने सिर्फ काग़ज़ी अधिकार दिए थे। बेरोज़गारी भत्ते में ऐसे क्लॉज डाल दिए गए कि किसी को उसका लाभ ही न मिले- हमने वो अन्यायपूर्ण प्रावधान हटाया।
हमने मनरेगा पर करीब 9 लाख करोड़ रुपये खर्च किए और जब लगा कि लक्ष्य पूरे नहीं हो रहे, तो विकसित भारत और विकसित गांव के लिए ‘जी राम जी’ योजना लेकर आए।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने जो चिट्ठी सोशल मीडिया पर पोस्ट की है, वो झूठ और फरेब का प्रमाण है। कांग्रेस ने अपना आइडिया, आइडियोलॉजी और आइडियल तीनों छोड़ दिए। राष्ट्र प्रथम और विकास से उसका कांग्रेस का कोई सरोकार नहीं रहा।अगर विकसित भारत जी राम जी भी है तो देश और गांव के विकास के लिए है।
ये भी बोले-
सोशल मीडिया पर कांग्रेस के दो वीडियो देखे, उसमें भी आदमी नहीं दिख रहे, AI जनरेटेड हैं
खड़गे जी और राहुल जी झूठ और भ्रम फैलाकर कांग्रेस की जड़ें मजबूत नहीं खोखली कर रहे हैं
कांग्रेस भ्रम फैला रही है कि, चुनिंदा पंचायतों को ही काम मिलेगा, जबकि यह कानून देश की हर ग्राम पंचायत पर समान रूप से लागू होगा
मजदूरी छीने जाने की बात सरासर झूठ है, मजदूरी देने में विलंब होने पर अतिरिक्त भुगतान देना होगा
राहुल जी, खड़गे जी ऐसा झूठ और भ्रम फैलाना आपको शोभा नहीं देता
राहुल जी, खड़गे जी, आपने मनरेगा में जो अधिकार दिया था वो केवल कागजी अधिकार था
जी राम जी कानून मजदूरों के अधिकारों को कमजोर नहीं, पूरी तरह सुरक्षित और मजबूत करता है
मैं कांग्रेस के 4 झूठे आरोपों का पर्दाफाश करना चाहता हूं–
वो कह रहे हैं कि काम का अधिकार छीना जा रहा है। मैं अपने विपक्षी मित्रों को कहना चाहता हूं कि विकसित भारत – जी राम जी योजना में अधिकार को अधिक मजबूत किया गया है। 100 दिन के बजाए अब 125 दिन के काम की कानूनी गारंटी दी गई है।
सिर्फ काम ही नहीं, 15 दिन में बेरोजगारी भत्ता देना अनिवार्य किया गया है। कागज़ी प्रावधान नहीं, ज़मीन पर असर हो इसलिए Dis-entitlement Clause हटा दिया गया है।
भ्रम फैलाया जा रहा है कि चुनिंदा पंचायतों को ही काम मिलेगा। सच्चाई यह है कि यह कानून पूरे देश की हर ग्राम पंचायत पर समान रूप से लागू होगा। कोई पंचायत बाहर नहीं है।
मजदूरी छीने जाने की बात भी सरासर झूठ है। अगर 7 से 14 दिन में मजदूरी नहीं मिली, तो विलंब का अतिरिक्त भुगतान भी देना होगा।
राहुल जी, यह कानून मजदूरों के अधिकारों को कमजोर नहीं, बल्कि पूरी तरह सुरक्षित और मजबूत करता है।

