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Thursday, January 22, 2026
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अलका लांबा ने कहा- वीआईपी को बचा रही भाजपा सरकार, सीएम इस्तीफा दो

http://Alka Lamba said, “The BJP government is protecting VIPs. The Chief Minister should resign, and a CBI inquiry should be completed within six months under the supervision of a sitting judge.”

कांग्रेस ने अंकिता भंडारी हत्याकांड में मांगा उत्तराखंड के मुख्यमंत्री धामी का इस्तीफा

अलका लांबा ने कहा- वीआईपी को बचा रही भाजपा सरकार

सीबीआई जांच वर्तमान जज की निगरानी में छह महीने के भीतर पूरी की जाए- कांग्रेस

मुख्यमंत्री धामी उत्तराखंड की जनता का विश्वास खो चुके हैं, पद पर बने रहने का उनका नैतिक अधिकार नहीं बचा – वैभव वालिया

Newdelhi@नई दिल्ली@कांग्रेस ने उत्तराखंड के अंकिता भंडारी हत्याकांड में भाजपा सरकार पर पार्टी के उच्च पदाधिकारियों को बचाने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का इस्तीफा मांगा है। पार्टी ने कहा कि यह केवल एक हत्या नहीं, बल्कि सत्ता संरक्षण और चुप्पी की राजनीति का एक घिनौना चेहरा है।

कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष अलका लांबा और कांग्रेस संचार विभाग के सचिव वैभव वालिया ने कहा कि व्यापक जन आंदोलन के दबाव में मुख्यमंत्री धामी को इस मामले में सीबीआई जांच की घोषणा करनी पड़ी। उन्होंने मांग की कि यह जांच किसी वर्तमान जज की निगरानी में फास्ट ट्रैक मोड में छह महीने के भीतर पूरी की जाए।

अलका लांबा ने मामले का विवरण देते हुए बताया कि 19 वर्षीय अंकिता भंडारी पौड़ी गढ़वाल के यमकेश्वर स्थित भाजपा नेता विनोद आर्य के रिसोर्ट में 28 अगस्त 2022 को नौकरी पर लगी थी। 18 सितंबर 2022 को उस पर वीआईपी मेहमानों को अनैतिक सेवाएं देने का दबाव बनाया गया, जिसे उसने साहसपूर्वक ठुकरा दिया। उसी दिन उसकी हत्या कर शव चीला नहर में फेंक दिया गया।

भाजपा सरकार पर अपराधियों को संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए अलका लांबा ने कहा कि हत्या के बाद पांच दिनों तक न तो एफआईआर दर्ज की गई और न ही कोई गंभीर जांच हुई। 23 सितंबर को स्थानीय भाजपा विधायक रेनू बिष्ट ने मुख्यमंत्री धामी के निर्देश पर बिना किसी न्यायिक आदेश के रिसोर्ट पर बुलडोजर चलवाकर अहम सबूत नष्ट करवा दिए, जबकि 24 सितंबर को अंकिता का शव बरामद हुआ। इसके बाद जनआक्रोश बढ़ा तो मजबूरी में तीन आरोपियों की गिरफ्तारी की गई। उन्होंने कहा कि तीन साल बीत जाने के बावजूद आज तक यह स्पष्ट नहीं किया गया कि वह वीआईपी कौन था, जिसके लिए अंकिता पर दबाव बनाया गया था। उन्होंने पूछा कि यदि एसआईटी जांच में वीआईपी का नाम सामने आया है तो उसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया और यदि नाम सामने नहीं आया तो सरकार ने इसका स्पष्ट खंडन क्यों नहीं किया।

लांबा ने कहा कि अंकिता भंडारी के पिता बार-बार अजय कुमार और दुष्यंत कुमार के नाम ले रहे हैं। उन्होंने पूछा कि क्या एसआईटी ने उनसे पूछताछ की? मुख्यमंत्री धामी उन्हें बचाने का प्रयास क्यों कर रहे हैं? उन्होंने कहा कि अंकिता के पिता ने जिस नेता का नाम लिया, वो आज भी भाजपा का उत्तराखंड प्रभारी है। वह प्रदेश में आवाजाही कर रहा है और हर चीज को प्रभावित करने की क्षमता रखता है। लांबा ने मांग की कि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए इन सभी अपराधियों को उत्तराखंड की धरती से दूर रखा जाए।

इस मौके पर कांग्रेस नेता वैभव वालिया ने उत्तराखंड में पेपर लीक मामलों और त्रिपुरा के छात्र एंजेला चकमा की हत्या समेत हाल के महीनों में हुई कई घटनाओं का उल्लेख करते हुए राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि अंकिता हत्याकांड में राज्य सरकार ने शुरू से ही इसमें शामिल वीआईपी को बचाने की कोशिश की। अब भाजपा के ही पूर्व विधायक की पत्नी ने उस वीआईपी का नाम बता दिया है, जिसके बाद दोबारा लोगों ने पूरे उत्तराखंड की सड़कों पर आकर हज़ार से अधिक प्रदर्शन किए और सीबीआई जांच की मांग की। उत्तराखंड की जनता के आंदोलन के कारण मजबूर होकर मुख्यमंत्री को सीबीआई जांच की घोषणा करनी पड़ी।

कांग्रेस नेताओं ने मांग की कि अंकिता हत्याकांड में सबूत नष्ट करने के आदेश देने वालों पर भी कार्रवाई हो, महिला कार्यस्थलों पर सुरक्षा कानूनों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए, महिलाओं और लड़कियों के ख़िलाफ अपराध करने वालों को राजनीतिक संरक्षण देने वालों की जवाबदेही तय हो, और भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक स्वतंत्र जांच तंत्र अनिवार्य किया जाए।

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