http://Union Minister Pradhan’s clear message: The government is responsible for the infrastructure and salaries in schools, but the management should be handled by the community.
– समग्र शिक्षा के भविष्य के रोडमैप पर मंथन
Sandhyamidday@नईदिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धमेंद्र प्रधान ने मौजूदा शिक्षा व्यवस्था पर असंतोष जाहिर करके दो टूक कहा है कि स्कूलों का संचालन समाज को संभालना चाहिए। स्कूलों में व्यवस्था और तनख्वाह सरकार का दायित्व हो, लेकिन संचालन का दायित्व समाज का हो। इसका रास्ता कैसे निकलेगा, आज जब हम समग्र शिक्षा के नए प्रारूप की ओर बढ़ रहे हैं, तो हमे यह भी सोचना होगा।
उन्होंने शुक्रवार को नईदिल्ली में समग्र शिक्षा 3.0 पर हितधारकों के साथ नए सिरे से समग्र शिक्षा की परिकल्पना विषय पर एक दिवसीय परामर्श बैठक में यह बात कही। यहां उन्होंने कहा कि 2047 तक विकसित भारत का विजन तभी साकार हो सकता है, जब भारत के प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त हो और देश में कक्षा बारहवीं तक शत-प्रतिशत नामांकन हो। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सीखने संबंधी खाइयों को पाटना, स्कूल छोडऩे वालों की संख्या को कम करना, अधिगम एवं पोषण परिणामों में सुधार करना, शिक्षकों की क्षमता को मजबूत करना, महत्वपूर्ण कौशलों को बढ़ावा देना और अमृत पीढ़ी को मैकाले की मानसिकता से आगे ले जाना, ये सभी सशक्त मानव पूंजी के निर्माण की साझा जिम्मेदारियां हैं। केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि मंच पर साझा किए सहयोगात्मक विचार-विमर्श और नवोन्मेषी सुझाव विद्यालयी शिक्षा इकोसिस्टम को मजबूत करने तथा समग्र शिक्षा की नए सिरे से परिकल्पना कर उसे परिणामोन्मुख, वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी, भारतीयता में निहित और विद्यार्थियों की विविध आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशील बनाने के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार करने में सहायक होंगे।
समाज के भरोसे सौंपना जरूरी
उन्होंने जोर दिया कि विद्यार्थियों के समग्र विकास को बढ़ावा देने और प्रौद्योगिकी के सार्थक एकीकरण के माध्यम से ज्ञान तक पहुंचने का विस्तार करने के लिए विद्यालयों को एक बार फिर समाज के भरोसे सौंपना आवश्यक है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के लिए एक मजबूत और समग्र वार्षिक योजना तैयार करने और इसे एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाने की जरूरत है।
योजनाएं तभी सफल, जब जमीनी दृष्टिकोण हो-

