संसद सत्र के समय डील की जानकारी भारत सरकार से नहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति से मिली, ये संसद का अपमान
भारतीय किसान भारी सब्सिडी वाले अमेरिकी उत्पादों से कैसे मुकाबला करेंगे, एमएसपी प्रणाली पर दबाव पड़ेगा
तंज कसते हुए कहा- पहले ‘लाल आंख’ दिखाने वाले आज चीन के लिए रेड कार्पेट बिछा रहे
sandhyamidday@नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील को भारतीय किसानों को बर्बाद करने वाला बताते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी घुटने टेक रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि संसद सत्र के समय इस डील की जानकारी सांसदों को भारत सरकार से नहीं, बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मिली, ये संसद का अपमान है।
राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने अमेरिकी कृषि मंत्री के बयान का हवाला देते हुए कहा कि इस डील से अमेरिकी कृषि उत्पाद भारत के विशाल बाजार में ज्यादा निर्यात होंगे और ग्रामीण अमेरिका में नकदी जाएगी। खरगे ने कहा कि भारत के किसान भारी सब्सिडी वाले अमेरिकी उत्पादों से कैसे मुकाबला करेंगे।
कांग्रेस अध्यक्ष ने इस डील को किसान विरोधी बताते हुए कहा कि कृषि आयात बढ़ने से एमएसपी प्रणाली पर दबाव पड़ेगा। बिना तैयारी के करोड़ों भारतीय किसानों को संपन्न अमेरिकी किसानों के सामने खड़ा कर दिया गया। इस डील से किसानों को कुचलने की तैयारी की जा रही है।
विफल विदेश नीति पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाने पर लेते हुए खरगे ने कहा कि ट्रंप बार-बार भारत को अपमानित कर रहे हैं। ट्रंप का दावा है कि उन्होंने ट्रेड धमकी से भारत-पाक युद्ध रोका और मोदी ने उन्हें खुश करने के लिए रूसी तेल आयात घटाया। अब ट्रंप घोषणा करते हैं कि भारत वेनेजुएला से तेल खरीदेगा।
चीन को लेकर उन्होंने मोदी सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि पहले ‘लाल आंख’ दिखाने वाले आज चीन के लिए ट्रेड का रेड कार्पेट बिछा रहे हैं, जबकि गलवान के बाद चीन लद्दाख-अरुणाचल पर दावा कर रहा है। वह भारत के साथ आर्थिक रिश्ते अपनी शर्तों पर तय कर रहा है। उन्होंने इसे स्ट्रैटेजिक सरेंडर बताया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमले हो रहे हैं, फिर भी मोदी सरकार चुप है।
सामाजिक न्याय पर खरगे ने कहा कि मोदी सरकार के शासन में महिलाओं, दलितों, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों पर अत्याचार बढ़े हैं। सरकार ने जातिगत जनगणना को पहले खारिज किया, अब मजबूरी में माना गया। मनरेगा, सूचना का अधिकार, शिक्षा का अधिकार जैसे कानून कमजोर किए गए। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की सोच में संविधान नीचे और मनुस्मृति ऊपर है।
उन्होंने कहा कि भाजपा के एक मुख्यमंत्री के मुस्लिमों को निशाना बनाने वाले बयान और चर्चों पर हमले लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी हैं।
आर्थिक असमानता पर उन्होंने वर्ल्ड इनइक्वलिटी रिपोर्ट 2026 का हवाला देते हुए कहा कि देश में अमीर और अमीर, गरीब और गरीब हो रहे हैं। उन्होंने रुपये के गिरते मूल्य पर भी चिंता जताई। उन्होंने बेरोजगारी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि आज देशभर में 50 लाख से ज्यादा सरकारी पद खाली हैं। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि देश भर में नौजवानों में बढ़ता नशा राष्ट्रीय चिंता का विषय है।
खरगे ने याद दिलाया कि यूपीए सरकार ने मनरेगा को अधिकार आधारित बनाया था, जिसमें मांग पर करोड़ों मजदूरों को कानूनी गारंटी मिली थी। लेकिन मोदी सरकार ने नया कानून लाकर मजदूरों का अधिकार छीन लिया। अब देश में गरीब और कमजोर तबकों के लोग बंधुआ मजदूर बन जाएंगे। उन्होंने श्रम कानूनों को पूंजीपतियों के फायदे के लिए कमजोर करने का भी आरोप लगाया।
उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष को संसद में कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों से जुड़े प्रश्नों पर चर्चा की अनुमति नहीं दी जा रही है। प्रधानमंत्री खुद सवालों से बचते हैं। उन्होंने कहा कि संसदीय जवाबदेही से बचना संसदीय विशेषाधिकार का उल्लंघन ही नहीं, लोकतंत्र को खत्म करने का तरीका है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार मनमाने तरीके से देश पर नए कानून थोपना चाहती है। इसलिए तमाम विधेयक जबरदस्ती पारित किए जाते हैं।

