An AI-based automatic number plate recognition system will be installed at Delhi’s borders, allowing for the instant identification of vehicles from outside the city.
Sandhyamidday@Newdelhi@ दिल्ली में प्रदूषण की समस्या को थामने के लिए अब दिल्ली सरकार ने नए कदम उठाना तय किए हैं। इसके तहत दिल्ली की सीमाओं पर एआई बेस्ड ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकनाइजेशन सिस्टम लगाया जाएगा। इससे दिल्ली के बाहर से आने वाली दूसरे राज्यों की गाड़ियों को एंट्री के समय ही पहचाना जा सकेगा।
इस सिस्टम के तहत जो गाड़ियां दिल्ली में नियम तोड़ती है या एंट्री के समय ही नियम तोड़ती है या फिर 15 साल से ज्यादा पुरानी है, उनको तुरंत रोका जा सकेगा या उन पर जुर्माना लगाया जा सकेगा। दिल्ली सरकार का मकसद दिल्ली की हवा को सुधारना है, इसलिए ट्रैफिक नियमों में बेहद सख्ती बरतने के कदम उठाए जा रहे हैं। इसके तहत दिल्ली में स्पेशल स्मार्ट पार्किंग एरिया भी बनाए जाएंगे। इसमें पीक अवर्स में एक्स्ट्रा चार्ज लिया जाएगा, ताकि गाड़ियों की संख्या को काम किया जा सके।
इतना ही नहीं, दिल्ली में बेतरतीब वाहन पार्किंग को लेकर अब और सख्ती होगी। दिल्ली के कुछ इलाकों में सड़कों के किनारे गाड़ियां खड़ी होती है, जो अब सख्ती के साथ रोकी जाएगी। दिल्ली के कोर सर्कल में सड़कों के किनारे गाड़ियां नहीं खड़ी होती है, लेकिन अंदरूनी इलाकों में यह समस्या कायम है। अब दिल्ली सरकार इस पर भी सख्ती बढ़ायेगी। इसकी वजह गाड़ियों की कमी से वायु प्रदूषण में भी कमी आना है की संभावना है।
प्रदूषण नियंत्रण के लिए तैयार प्लान
- इस साल के आखिर तक 3,535 ई-बसों की संख्या बढ़ाकर छह हज़ार, अगले साल साढ़े सात हज़ार, 2028 तक 10,400 और 2029 तक 14,000 करने का लक्ष्य है।
- नई इलेक्ट्रिक वाहन पॉलिसी 58 लाख दो-पहिया वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने के लिए स्क्रैप इंसेंटिव देगी और ई-वाहनों की खरीद पर सब्सिडी की रकम बढ़ाएगी।
- पब्लिक चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग पॉइंट्स की संख्या नौ हज़ार से बढ़ाकर 36 हज़ार करने का लक्ष्य है।
- 62 ट्रैफिक जाम पॉइंट्स की पहचान की गई है, और उनमें से 30 पर सुधार का काम शुरू हो गया है।
- फिलहाल, दिल्ली मेट्रो का 395 किमी का नेटवर्क है। इसे चौथे चरण में 110 किमी और चरण 5A और 5B में 96 किमी तक बढ़ाया जाएगा। अगले चार सालों में नमो ट्रेन का कुल नेटवर्क 323 किमी होगा।
- 3300 किमी सड़कों के पुनर्निर्माण और सुधार पर सालाना छह हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
- सड़कों की सफाई के लिए 76 मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनें लगाई गई हैं। नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के तहत, नगर निगम इस महीने 14 अतिरिक्त मशीनें लगाएगा। 60 फीट से कम चौड़ी सड़कों के लिए 70 और मशीनें लगाने की इजाजत दे दी गई है। PWD सड़कों पर 70 मशीनें, 140 कूड़ा उठाने वाले, डस्ट डंपर और वॉटर टैंकर लगाने का फैसला किया गया है।
- कचरा मैनेजमेंट के लिए, दिल्ली सरकार ने घोषणा की है कि वह इस साल नगर निगम को पांच सौ करोड़ रुपये और उसके बाद हर साल तीन सौ करोड़ रुपये देगी।
- एक हजार से ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाली इंडस्ट्रियल यूनिट्स को सील कर दिया गया है। बड़ी यूनिट्स को रियल-टाइम प्रदूषण मॉनिटरिंग सिस्टम लगाने का निर्देश दिया गया है।
- इस साल रिज एरिया में 14 लाख पौधे लगाने और अगले चार सालों में 35 लाख पौधे लगाने का टारगेट है।
- तेहखंड में एक नया C&D (कंस्ट्रक्शन और डिमोलिशन) कचरा प्रोसेसिंग प्लांट शुरू किया जाएगा। सर्दियों में कोयला और कचरा जलाने से रोकने के लिए, 15,500 इलेक्ट्रिक हीटर बांटे जा रहे हैं।
- नए पार्किंग एरिया बनाए जाएंगे, और एक स्मार्ट प्राइसिंग सिस्टम लागू किया जाएगा। पीक आवर्स के दौरान पार्किंग के लिए ज्यादा चार्ज लिया जाएगा।

