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Thursday, January 22, 2026
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दिल्ली में विश्व पुस्तक मेले का आगाज, 20 लाख लोग आएंगे, फ्रांस-स्पेन-कतर तक फैला दायरा

http://The World Book Fair has begun in Delhi, expecting 2 million visitors; its reach extends to France, Spain, and Qatar, and for the first time, entry is free.

– विश्व पुस्तक मेला 2026 : सैन्य इतिहास की थीम के साथ शुभारंभ, पहली बार मुफ्त प्रवेश

Sandhyamidday@नईदिल्ली। भारतीय किताबों की पसंद व लोकप्रियता का दायरा अब विदेशों तक पहुंच गया है। दिल्ली में विश्व पुस्तक मेला 2026 का आगाज शनिवार को हो गया। हर साल होने वाले इस विश्वस्तरीय पुस्तक मेले में पहली बार मुफ्त प्रवेश दिया जा रहा है। इसमें स्पेन और कतर से लेकर 35 देशों के प्रकाशक शिरकत कर रहे हैं। स्पेन व कतर फोकस वाले देश हैं, जबकि रूस, जापान, फ्रांस, पोलैंड, ईरान, कजाखस्तान, हंगरी और चिली सहित 35 से अधिक देशों के प्रकाशक भी शामिल हैं। यह मेला 18 जनवरी 2026 तक चलेगा।

मंत्री ने किया शुभारंभ

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धमेंद्र प्रधान ने शनिवार को इसका शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि नईदिल्ली विश्व पुस्तक मेला केवल विचारों का संगम नहीं, बल्कि भारत की सशक्त और जीवंत पठन संस्कृति का भव्य उत्सव है। पीएम नरेंद्र मोदी ने पढऩे की संस्कृति को जन आंदोलन बना दिया है। विकसित भारत की परिकल्पना का आधार केवल इंफ्रास्ट्रक्चर या टेक्नोलॉजी तक सीमित नहीं है, बल्कि एक ऐसी जागरूक, विचारशील और पढऩे-सोचने वाली पीढ़ी का निर्माण है जो ज्ञान को राष्ट्र निर्माण का मूल आधार माने। यह आयोजन पढऩे की संस्कृति को नई ऊर्जा देने वाला है।

द सागा ऑफ कुदोपली-

संबलपुर के आंदोलन पर आधारित किताब द सागा ऑफ कुदोपली- द अनसंग स्टोरी ऑफ 1857 के संस्करणों का लोकार्पण किया गया। शिक्षा मंत्री ने बताया कि यह किताब बांग्ला, असमिया, पंजाबी, मराठी, मलयालम और उर्दू सहित 9 भारतीय भाषाओं तथा एक अंतरराष्ट्रीय भाषा स्पेनिश में प्रकाशित है। पूर्व में इसे हिंदी, अंग्रेज़ी और ओडिया में प्रकाशित हो चुकी है। इसमें कुदोपली के सुरेन्द्र साईं और स्थानीय स्वतंत्रता सेनानियों के प्रतिरोध को बताया है। यह आंदोलन 1827 से 1862 तक औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध सबसे लंबे सशस्त्र विद्रोह के रूप में हुआ था।

स्पेन और कतर के मंत्री ने कहा- महत्वपूर्ण अवसर

स्पेन के संस्कृति मंत्री अर्नेस्ट उर्तासुन डोमेनेक ने कहा कि यह मेला भारत में स्पेनिश लेखकों को बढ़ावा देने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है, जहाँ स्पेनिश भाषा और साहित्य में रुचि निरंतर बढ़ रही है। उन्होंने जुआन रामोन हिमेनेज़ और रवींद्रनाथ टैगोर के बीच ऐतिहासिक साहित्यिक संबंधों को भी याद किया। कतर के संस्कृति मंत्री अब्दुलरहमान बिन हमद बिन जासिम बिन हमद अल थानी ने कहा कि कतर की भागीदारी दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों की गहराई को दर्शाती है व संस्कृति और ज्ञान को जन-से-जन संपर्क और राष्ट्र निर्माण की आधारशिला के रूप में पुन: स्थापित करती है।

तीन प्रमुख प्रश्नों का जवाब

एनबीटी-भारत के अध्यक्ष प्रो. मिलिंद सुधाकर मराठे ने कहा कि मेला तीन प्रमुख प्रश्नों ‘क्यों पढ़ें, क्या पढ़ें और कैसे पढ़ें’ को संबोधित करता है। विशेषकर युवाओं में दीर्घकालिक पठन संस्कृति के विकास का लक्ष्य रखता है। उन्होंने भारत, कतर और स्पेन के राष्ट्रीय आदर्श वाक्यों में निहित सत्य, प्रगति और सामूहिक सहभागिता जैसे साझा मूल्यों की ओर ध्यान आकर्षित किया, जो मेले में साकार होते हैं। एनबीटी भारत के निदेशक युवराज मलिक ने कहा कि हमारे लिए प्रकाशन लाभ का नहीं, उद्देश्य का कार्य है। मेले में प्रदर्शित प्रत्येक पुस्तक राष्ट्र निर्माण में योगदान देती है।

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