हाईकोर्ट ने दिल्ली के सरकारी स्कूलों में कमियां बताने का दिया निर्देश, सर्वे रिपोर्ट की तलब
कोर्ट ने कहा कि सर्वेक्षण रिपोर्ट मेंम यह भी जानकारी होनी चाहिए की स्कूलों का इंफ्रास्ट्रक्टर शिक्षा के अधिकार कानून के अनुसार है या नहीं.
Sandhyamidday@नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार, दिल्ली नगर निगम और नई दिल्ली नगरपालिका परिषद को निर्देश दिया है कि वो दिल्ली के सरकारी स्कूलों का सर्वेक्षण कर बताएं कि स्कूलों में कानून के मुताबिक क्या-क्या कमियां हैं. चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि ये सर्वेक्षण चार हफ्ते में पूरा कर रिपोर्ट दाखिल करें.
कोर्ट ने कहा कि पूरे सर्वेक्षण की मानिटरिंग दिल्ली सरकार के शिक्षा सचिव, दिल्ली नगर निगम के आयुक्त और नई दिल्ली नगरपालिका परिषद के चेयरमैन करेंगे. सर्वेक्षण रिपोर्ट में ये जरूर होना चाहिए कि क्या स्कूलों का इंफ्रास्ट्रक्टर शिक्षा के अधिकार कानून के मुताबिक हैं या नहीं.
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील खगेश झा और शिखा शर्मा बग्गा ने कहा कि शिक्षा के अधिकार कानून के तहत प्राथमिक स्कूलों में छात्र और शिक्षक अनुपात, विषयवार शिक्षक और ज्यादा बच्चों वाले स्कूलों में विषय के हेड टीचर का प्रावधान किया गया है. इस कानून के तहत स्कूलों के भवन सभी मौसम के अनुकूल होना चाहिए. हर स्कूल में टॉयलेट, पीने का पानी, किचन और खेल के मैदान जरुर होने चाहिए. इसके अलावा स्कूलों को न्यूनतम कार्यदिवस का भी प्रावधान है. शिक्षा के अधिकार कानून के तहत हर शिक्षक को हफ्ते में न्यूनतम 45 घंटे काम करना अनिवार्य है.
कोर्ट ने इस बात पर गौर किया कि शिक्षा के अधिकार कानून की धारा 11 और 19 के तहत सभी स्कूलों को न्यूनतम पात्रता पूरी करनी होगी. कोर्ट ने ये निर्देश दिया कि दिल्ली के सभी सरकारी स्कूलों का सर्वे किया जाए कि वो इस कानून के तहत न्यूनतम पात्रता पूरी करते हैं कि नहीं.

