http://Anand Mahindra tweeted about the first woman IPS officer.
Sandhyamidday@ नई दिल्ली। भारतीय पुलिस सेवा के इतिहास में एक नाम हमेशा के लिए दर्ज हो गया है. अरुणाचल प्रदेश के तवांग की तेंजिन यांग्की ने राज्य की पहली महिला आईपीएस अफसर बनने का गौरव हासिल किया है.
भारतीय महिलाएं घर-परिवार, समाज के तमाम बैरियर तोड़कर अपनी खास पहचान बना रही हैं. इसी मॉडर्न भारत की एक शांत, लेकिन मजबूत इरादों वाली लड़की तेंजिन यांग्की ने अरुणाचल प्रदेश की पहली महिला आईपीएस अफसर बनने का रिकॉर्ड अपने नाम पर दर्ज करवा लिया है. यूपीएससी सीएसई 2022 में 545वीं रैंक उनके लिए सिर्फ स्कोरकार्ड का हिस्सा नहीं थी- यह अरुणाचल प्रदेश की हजारों लड़कियों के लिए खुली चुनौती थी कि अब बड़े सपने देखना अपराध नहीं! तेंजिन यांग्की उस इतिहास का पहला अध्याय हैं, जो जेंडर बैरियर को चीरते हुए देश सेवा के लिए आगे आई हैं. उनकी इस शानदार और प्रेरणादायक सफलता की गूंज सिर्फ नॉर्थ ईस्ट तक नहीं रुकी.
उनकी कहानी ने पूरे देश को झकझोर दिया, यहां तक कि मशहूर उद्योगपति आनंद महिंद्रा भी खुद को रोक नहीं पाए! महिंद्रा ने तेंजिन यांग्की की तारीफ करते हुए उन्हें एक ऐसा अकेला मशालची बताया, जो आने वाली पीढ़ी को राह दिखाने के लिए पहले खुद अंधेरे में चलता है. हैदराबाद की पुलिस एकेडमी में जब 36% महिला अधिकारियों के साथ तेंजिन यांग्की ने कदमताल किया तो यह एक क्रांति थी- एक संदेश कि अब भारत की बेटियां देश की सेवा के लिए फ्रंटलाइन पर आ चुकी हैं.
पब्लिक सर्विस की विरासत: IPS का जुनून
तेंजिन यांग्की एक ऐसे परिवार से आती हैं, जहां राष्ट्र की सेवा करना परंपरा रही है. उनके दिवंगत पिता, थुप्टेन टेंपा पूर्व IAS अधिकारी और मंत्री थे. तेंजिन की मां भी रिटायर्ड सरकारी सचिव हैं. घर में प्रशासनिक अनुशासन का माहौल होने के बावजूद यांग्की ने अपने लिए वर्दी का मुश्किल रास्ता चुना. 2017 में APPSC परीक्षा पास करने का उनका पुराना अनुभव दिखाता है कि राष्ट्र सेवा और परीक्षा की तैयारी के प्रति उनकी लगन पहले से ही गहरी थी. उन्होंने माता-पिता की विरासत को आगे बढ़ाया. लेकिन आईपीएस अधिकारी बनकर एक्सीलेंस का अपना रास्ता खुद गढ़ा.
आनंद महिंद्रा को मिली मंडे मोटिवेशन
अरुणाचल प्रदेश की पहली महिला आईपीएस अधिकारी तेंजिन यांग्की की सफलता पर उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने एक खास पोस्ट शेयर किया. उन्होंने तेंजिन की कहानी को मंडे मोटिवेशन बताया. आनंद महिंद्रा ने यांग्की को एकाडमिक और सिविल सर्वेंट के रूप में सराहा. उन्होंने लिखा- पहला होना कभी आसान नहीं होता. इसका मतलब है कि आप पहले अकेले चलते हैं, ताकि अन्य लोग एक दिन आपके साथ चल सकें. आज अकेले चलने से मत डरिए… दूसरे आपका अनुसरण करेंगे. यांग्की की उपलब्धि सिर्फ व्यक्तिगत नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय प्रेरणा का बड़ा सोर्स है.
नॉर्थ ईस्ट के लिए ‘गेम चेंजर’
आईपीएस अफसर तेंजिन यांग्की की जीत अरुणाचल प्रदेश और पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए बड़ा सामाजिक संदेश है. उन्होंने लैंगिक बाधाओं (Gender Barriers) को तोड़ा है. अब वह अपने राज्य की हजारों युवा महिलाओं के लिए प्रेरणा का प्रतीक बन गई हैं, जो उन्हें सिविल सेवाओं में आने के लिए प्रोत्साहित करेंगी. उनकी सफलता से पता चलता है कि दृढ़ संकल्प और समर्पण के सामने भौगोलिक या लैंगिक.. किसी भी तरह की बाधा टिक नहीं सकती है. यह मील का पत्थर राष्ट्रीय प्रशासनिक सेवाओं में पूर्वोत्तर क्षेत्र के बढ़ते और महत्वपूर्ण प्रतिनिधित्व को भी मजबूती देता है.

