विश्वविद्यालयों का उद्देश्य युवाओं में संवैधानिक और नागरिक चेतना का विकास करना एवं ‘राष्ट्र सर्वप्रथम’ के भाव से ओत-प्रोत पीढ़ी तैयार करना होना चाहिए : लोकसभा अध्यक्ष
तकनीक का उपयोग केवल सुविधाओं तक सीमित न रहे, बल्कि मतदाताओं को जागरूक और सशक्त बनाने में भी हो : लोकसभा अध्यक्ष
तकनीक का उपयोग केवल सुविधाओं तक सीमित न रहे, बल्कि मतदाताओं को जागरूक और सशक्त बनाने में भी हो : लोकसभा अध्यक्ष
O.P. Jindal Global University द्वारा प्रारंभ किए गए तीन प्रमुख शैक्षणिक कार्यक्रमों के उद्घाटन अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ने मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित प्रतिभागियों को संबोधित किया
sandhyamidday@नई दिल्ली@नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित एक कार्यक्रम में O.P. Jindal Global University द्वारा प्रारंभ किए गए तीन प्रमुख शैक्षणिक कार्यक्रमों के उद्घाटन अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने मुख्य अतिथि के रूप उपस्थित प्रतिभागियों को संबोधित किया।
अपने संबोधन में लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्रदान करने वाले संस्थान नहीं, बल्कि राष्ट्र-निर्माण की आधारशिला भी होते हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों का उद्देश्य युवाओं में संवैधानिक नैतिकता, लोकतांत्रिक मूल्यों और नागरिक चेतना का विकास करना तथा ‘राष्ट्र सर्वप्रथम’ के भाव को आत्मसात करने वाली जागरूक और उत्तरदायी पीढ़ी तैयार करना होना चाहिए। उन्होंने विचार व्यक्त किया कि ओ.पी. जिंदल विश्वविद्यालय द्वारा आरंभ किए गए नए अकादमिक पाठ्यक्रम वर्तमान समय की आवश्यकताओं के अनुरूप हैं और लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं दूरदर्शी पहल हैं। ये कार्यक्रम न केवल सैद्धांतिक ज्ञान प्रदान करेंगे, बल्कि विद्यार्थियों को व्यावहारिक समझ और नेतृत्व क्षमता से भी सशक्त करेंगे।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि लोकतंत्र तभी मजबूत होता है जब प्रत्येक नागरिक जागरूक हो, अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों के प्रति भी सजग रहे और संवैधानिक मूल्यों का सम्मान करे। उन्होंने पॉलिटिकल कम्युनिकेशन, इलेक्शन मैनेजमेंट और लेजिस्लेटिव ड्राफ्टिंग जैसे विषयों को वर्तमान समय की अनिवार्य आवश्यकता बताते हुए कहा कि ये क्षेत्र लोकतांत्रिक प्रक्रिया की गुणवत्ता और प्रभावशीलता को सीधे प्रभावित करते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि चुनावों में अधिकतम जनभागीदारी सुनिश्चित करने में इन पाठ्यक्रमों से प्रशिक्षित विद्यार्थियों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि भारत की चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता विश्वभर में सराही जाती है। आवश्यकता इस बात की है कि देश की युवा पीढ़ी इस प्रणाली का गहन अध्ययन करे, शोध करे और इसे और अधिक प्रभावी बनाने में योगदान दे।
लोकसभा अध्यक्ष ने आगे कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की दक्षता बढ़ाने के लिए जन-प्रतिनिधियों एवं संसदीय अधिकारियों का प्रशिक्षित, सक्षम और संवेदनशील होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने उल्लेख किया कि भारतीय संसद के PRIDE संस्थान ने 110 से अधिक देशों की संसदों के सदस्यों एवं अधिकारियों को प्रशिक्षण प्रदान कर वैश्विक स्तर पर भारत की संसदीय परंपरा और विशेषज्ञता को प्रतिष्ठित किया है।
उन्होंने कहा कि भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण लोकतंत्र में इलेक्शन मैनेजमेंट एक जटिल एवं वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसके लिए गहन विश्लेषण, निष्पक्ष दृष्टिकोण और तकनीकी दक्षता आवश्यक है। इस संदर्भ में तकनीक का उपयोग केवल प्रशासनिक सुविधा तक सीमित न रहकर मतदाताओं को जागरूक, शिक्षित और सशक्त बनाने का माध्यम भी बनना चाहिए।
बिरला ने आशा व्यक्त की कि जिंदल विश्वविद्यालय की यह पहल लोकतांत्रिक चेतना, सार्वजनिक सेवा, नीति-निर्माण और पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्टता के नए मानक स्थापित करने वाले युवाओं को तैयार करेगी। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन, प्राध्यापकों और विद्यार्थियों को इस अभिनव पहल के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ दीं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
कार्यक्रम में शिक्षाविदों, नीति-निर्माताओं, विद्यार्थियों एवं गणमान्य अतिथियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।

