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Thursday, January 22, 2026
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Delhi iit AI conference : एआई स्टार्टअप अब देश का भविष्य, दिग्गज जुटे एआई रोडमैप बनाने

http://At the AI ​​conference at IIT Delhi, the IIT COO said that AI startups and the industry will look strong in three to five years.

दिल्ली आईआईटी में एआई कांफ्रेंस, आईआईटी सीओओ ने कहा- तीन से पांच साल में मजबूत दिखेंगे एआई स्टार्टअप-इंडस्ट्री

भारत-एआई इम्पैक्ट समिट 2026 से पहले प्री-समिट कार्यक्रम में वैश्विक स्वास्थ्य नवाचार में भारत की बढ़ती ताकत पर चर्चा

Sandhyamidday@नईदिल्ली। देश के एआई भविष्य का रोडमैप तैयार करने के लिए शुक्रवार को दिल्ली में एआई सेक्टर के दिग्गज जुटे। इन्होंने कई पैनल डिस्कर्शन में भविष्य के एआई कामों को लेकर चर्चा की। स्वास्थ्य और जनसंख्या सहित अन्य सेक्टर में किस प्रकार एआई के कामों से क्रांति आएगी और अभी किन कामों को किया जा रहा है, इस पर प्रेजेंटेशन व मंथन हुआ। यहां एफआईटीटी-आईआईटी दिल्ली के चीफ ऑपरेटिंग ऑफीसर तरूण चतुर्वेदी ने कहा कि अभी भारत एआई अपनाने के प्रारंभिक चरण में है, लेकिन अगले तीन से पांच साल में एआई के नए और मजबूत स्टार्टअप व नवाचार दिखेंगे।

दिल्ली आईआईटी में भारत-एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के प्री-समिट कार्यक्रम के तहत यह मंथन हुआ। भारत-एआई इम्पैक्ट समिट 2026 से पूर्व इस प्री-समिट कार्यक्रम में बायोटेक और मेडटेक नवाचार में एआई का प्रभाव अगली सीमा विषय पर चर्चा हुई। इसमें एआई-आधारित बायोटेक और मेडटेक स्टार्टअप्स, निवेशक, चिकित्सक और इकोसिस्टम लीडर्स एक साथ आए। कार्यक्रम में दो विशेषज्ञ पैनल चर्चाएं, 12 चयनित एआई हेल्थटेक स्टार्टअप्स के लिए स्टार्टअप पिच सत्र और 15 से अधिक संभावित निवेशकों के साथ नेटवर्किंग पर चर्चा हुई।

ग्लोबल क्षमता
यहां बीएफआई के संस्थापक संदीप नैलवाल ने कहा कि भारत में एआई-आधारित स्वास्थ्य सेवा समाधानों को वैश्विक स्तर पर ले जाने की क्षमता है। इसके लिए जमीनी स्तर तक पहुंचने के लिए प्रौद्योगिकियों को बड़े पैमाने पर लागू किया जाना आवश्यक है। स्वास्थ्य सहित अन्य सेक्टर के कामों को प्रेजेंटेशन के जरिए विस्तार से बताया गया। इसमें विशेषज्ञों ने कहा कि एआई बड़े से बड़े डेटासेट को तेजी से एनालिसिस करने में मददगार है, जिससे नए विजन व अंतरदृष्टि सक्षम होती है। इससे सबसे बड़ा फायदा विश्लेषण में आसानी और सुधार है। डेटासेट एनालिसिस क्षमता बढऩे से भारत की जनसंख्या और संसाधनों संबंधित वास्तविकताओं व स्वास्थ्य सेवाओं के समाधान को इससे सहायता मिलती है। इसका उपयोग सामाजिक, सरकारी और निजी स्तर पर बढ़ा है।

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