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Wednesday, January 21, 2026
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Delhi की हवा में जहर : दिल्ली में 4 साल में बड़ी 10 फीसदी गाड़ियां निर्माण में 18% बढ़ोतरी

http://Poison in Delhi’s air: The number of large 10-foot vehicles manufactured in Delhi has increased by 18% in 4 years.

Sandhyamidday@Newdelhi@ दिल्ली की हवा में जहर घुला हुआ है। गाड़ियों के धुएं और दूसरे प्रदूषण के कारण हर रोज दिल्ली की हवा सियासी मुद्दा और आम आदमी की परेशानी बनी हुई है। AQI डाटा बताता है कि दिल्ली की हवा लगातार खराब हो रहा है। बीते 4 साल में दिल्ली में 10 फ़ीसदी गाड़ी की बढ़ोतरी हुई है , जबकि निर्माण में 18% की बढ़ोतरी हुई है। यह डाटा दिल्ली सरकार ने दिल्ली की विधानसभा में रखा है।

परिणाम (AQI डेटा)
• 2021–2024 में औसत AQI: 209
• वर्तमान सरकार के 11 महीनों में औसत AQI: 200
• जबकि इसी अवधि में 10% गाड़ियों में वृद्धि
• निर्माण गतिविधि 18% बढ़ी

  • “11 सालों की नाकामी बनाम 11 महीनों की मेहनत: रेखा गुप्ता सरकार ने किया प्रदूषण मुक्त दिल्ली की दिशा में ठोस कार्य”
  • श्री सिरसा बोले – “हम प्रदूषण से भागेंगे नहीं, उससे लड़ेंगे और उसे खत्म करके रहेंगे।”
  • “दिल्ली में प्रदूषण को पिछले 11 वर्षों में आम आदमी पार्टी ने इसे एक स्थायी संकट बना दिया। सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट और एनजीटी की बार-बार की फटकार के बावजूद उन्होंने सिर्फ प्रचार किया, काम नहीं।” – श्री मनजिंदर सिंह सिरसा, पर्यावरण मंत्री
  • “मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता जी के नेतृत्व में हमारी सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए पाँच स्तंभों पर आधारित स्पष्ट नीति बनाई है – डस्ट व सॉलिड वेस्ट प्रबंधन, औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण, वाहन प्रदूषण समाधान, हरित क्षेत्र विस्तार और संस्थागत सुधार।

पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने विधानसभा में दिए अपने विस्तृत वक्तव्य में दिल्ली में प्रदूषण के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य से लेकर वर्तमान सरकार की कार्ययोजना तक का तथ्यात्मक विवरण सदन के समक्ष रखा। उन्होंने बताया कि वर्ष 1984–85 में एम.सी. मेहता बनाम भारत सरकार मामले से लेकर सुप्रीम कोर्ट के सीएनजी आदेश, औद्योगिक रिलोकेशन और वाहन प्रदूषण मानकों तक कई निर्णायक फैसले लिए गए, लेकिन 2014 के बाद दिल्ली की स्थिति लगातार बदतर होती गई।

माननीय मंत्री ने कहा कि 2014 से 2025 तक दिल्ली को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और IQAir जैसी संस्थाओं ने लगातार दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी के रूप में चिन्हित किया, जो आम आदमी पार्टी सरकार की पूर्ण विफलता को दर्शाता है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट और एनजीटी की कई कड़ी टिप्पणियों का उल्लेख करते हुए कहा कि अदालतों ने बार-बार दिल्ली को “गैस चैंबर” और “रहने लायक़ नहीं” तक कहा, फिर भी तत्कालीन सरकार ने ठोस सुधार नहीं किए।

सिरसा ने कैग रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि ऑड-ईवन योजना असफल रही, पीयूसी व्यवस्था कमजोर रही और एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम तक निर्धारित गाइडलाइंस के अनुरूप नहीं लगाए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता के पैसों से स्मॉग टावर, ऑड-ईवन और अन्य अभियानों पर भारी प्रचार किया गया, लेकिन ज़मीनी परिणाम शून्य रहे।

इसके विपरीत, माननीय मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता के नेतृत्व में मौजूदा सरकार ने आते ही प्रदूषण के विरुद्ध “एक्शन मोड” अपनाया। तीनों लैंडफिल साइट्स – ओखला, भलस्वा और गाजीपुर- पर बायोमाइनिंग के ज़रिये हर महीने हजारों मीट्रिक टन कूड़ा हटाया जा रहा है और 45 एकड़ ज़मीन पुनः प्राप्त की जा चुकी है। एमसीडी को सॉलिड वेस्ट प्रबंधन के लिए विशेष वित्तीय सहायता दी गई है।

डस्ट मिटिगेशन के लिए सड़कों की एंड-टू-एंड कार्पेटिंग, एंटी-स्मॉग गन, वाटर स्प्रिंकलर, मैकेनिकल रोड स्वीपर्स और सख्त रोड कटिंग नीति लागू की गई है। निर्माण स्थलों और औद्योगिक क्षेत्रों में कड़ी निगरानी, भारी जुर्माने और सीलिंग की कार्रवाई की जा रही है।

वाहन प्रदूषण के मोर्चे पर, माननीय मंत्री ने बताया कि ‘नो पीयूसी, नो फ्यूल’ नीति लागू की गई है, फर्जी पीयूसी केंद्र बंद किए गए हैं और इलेक्ट्रिक बसों का देश का सबसे बड़ा बेड़ा तैयार किया जा रहा है। 2026 तक 7500 से अधिक इलेक्ट्रिक बसें सड़कों पर उतरेंगी, जिससे निजी वाहनों पर निर्भरता घटेगी।

हरित दिल्ली के लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए, 1994 के बाद पहली बार 10,000 एकड़ से अधिक भूमि को रिज़र्व फॉरेस्ट घोषित किया गया है। “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के तहत लाखों पौधे लगाए गए हैं और आने वाले समय में नए शहरी जंगल विकसित किए जा रहे हैं।

संस्थागत सुधारों के तहत विशेषज्ञ समितियों का गठन, डीपीसीसी में लंबित भर्तियों की पूर्ति और आधुनिक तकनीकी समाधानों को अपनाया गया है। माननीय मंत्री ने बताया कि इन ठोस कदमों का असर एयर क्वालिटी इंडेक्स और ‘सैटिस्फैक्टरी डेज़’ की संख्या में स्पष्ट सुधार के रूप में दिख रहा है।

अपने संबोधन का समापन करते हुए श्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री  रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार प्रदूषण के खिलाफ सिर्फ बयानबाज़ी नहीं, बल्कि निर्णायक और दीर्घकालिक समाधान लागू कर रही है। उन्होंने दोहराया कि दिल्ली अब रुकेगी नहीं, बल्कि समन्वय और ठोस नीति के साथ स्वच्छ हवा की ओर तेज़ी से आगे बढ़ेगी।

पर्यावरण मंत्री द्वारा सदन में प्रस्तुत किए गए तथ्य
• 2014 से 2025 तक दिल्ली को WHO और IQAir जैसी वैश्विक संस्थाओं ने लगातार दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी बताया।
• सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट और NGT ने बार-बार दिल्ली को “गैस चैंबर”, “रहने लायक़ नहीं” तक कहा।
• CAG रिपोर्ट के अनुसार ऑड-ईवन योजना विफल रही, 66% दोपहिया वाहनों को छूट दी गई और केवल 46% वाहनों का ही PUC परीक्षण हो पाया।
• नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (NCAP) के तहत मिले ₹81 करोड़ में से पिछली सरकार ने केवल ₹14 करोड़ खर्च किए।

11 महीनों में सीएम रेखा गुप्ता सरकार द्वारा किए गए प्रमुख कार्य (डेटा व आंकड़ों सहित)

  1. कूड़ा और सॉलिड वेस्ट प्रबंधन
    • ओखला, भलस्वा और गाजीपुर लैंडफिल पर
    • हर रोज़ 35,000 मीट्रिक टन लेगेसी वेस्ट का निस्तारण
    • 202 एकड़ में से 45 एकड़ भूमि पुनः प्राप्त
    • कूड़े के पहाड़ों की ऊँचाई 60 मीटर से घटाकर 40 मीटर, गाजीपुर में अतिरिक्त 15 मीटर की कमी
    • प्रतिदिन आने वाले 9,700 MT कचरे को वेस्ट-टू-एनर्जी में उपयोग; क्षमता बढ़ाकर 14,000 MT/दिन करने की तैयारी
    • MCD को सॉलिड वेस्ट के लिए ₹500 करोड़ की एकमुश्त सहायता; इसके अतिरिक्त मैकेनिकल सफ़ाई के लिए हर साल अतिरिक्त ₹300 करोड़
    • वार्ड स्तर पर हर महीने लगभग 250 MT कचरा हटाया जा रहा है
  2. डस्ट मिटिगेशन और सड़कों पर कार्रवाई
    • अब तक 700+ हॉटस्पॉट्स पर मिस्ट स्प्रे; लक्ष्य 2,500
    • 405 मोबाइल एंटी-स्मॉग गन
    • 284 वाटर स्प्रिंकलर
    • 74 मैकेनिकल रोड स्वीपर्स
    • 812 किमी सड़कों का रीडेवलपमेंट/रीकार्पेटिंग शुरू

    2025 में
    • 319 किमी MCD और 150 किमी PWD सड़कों की रीकार्पेटिंग शुरू
    • CRIF के तहत केंद्र से ₹803 करोड़ सड़क मरम्मत के लिए
    • आने वाले वर्षों में दिल्ली में 100 % मैकेनिकल रोड क्लीनिंग का लक्ष्य
  3. निर्माण और औद्योगिक प्रदूषण पर सख्ती
    • DPCC द्वारा 2,100 निर्माण स्थलों का निरीक्षण
    • 847 मामलों में उल्लंघन, ₹9 करोड़ जुर्माना
    • अतिरिक्त 1,070 चालान, करीब ₹1 करोड़ पेनल्टी
    • 1,886 साइट्स की जांच
    • 140 नॉन-कम्प्लायंट, ₹22 लाख जुर्माना
    • 27 रीडेवलपमेंट इंडस्ट्रियल एरिया में से 23 के नक्शे MCD में जमा
    • 8,000 उद्योगों को DPCC दायरे में लाया गया
  4. वाहन प्रदूषण और परिवहन
    • ‘नो PUC, नो फ्यूल’ नीति पूरे वर्ष लागू
    • फर्जी काम करने वाले 29 PUC स्टेशन बंद
    • 9 लाख नॉन-PUC वाहनों की पहचान कर चालान/कम्प्लायंस
    • दिसंबर 2026 तक 7500 AC इलेक्ट्रिक बसें
    • अब तक 1,500 नई इलेक्ट्रिक बसें जोड़ी गईं
    • 44 मेट्रो स्टेशनों पर ई-ऑटो
    • 40 मेट्रो स्टेशनों पर ऐप-आधारित टैक्सी सुविधा
    • दिल्ली में 9,000 EV चार्जिंग पॉइंट्स, लक्ष्य 16,000 (2026 तक)
  5. हरित दिल्ली और जैव विविधता
    • 1994 के बाद पहली बार
    • 10,082 एकड़ भूमि को रिज़र्व फॉरेस्ट घोषित

वर्ष 2025-26 में
• कुल 70 लाख पौधे लगाए जा रहे हैं
• केवल फॉरेस्ट डिपार्टमेंट द्वारा 53 लाख पौधे लगाए गए
• 20 नए शहरी जंगल प्रस्तावित (मियावाकी और ‘नमो वन’ सहित)

  1. संस्थागत सुधार और नवाचार • पूर्व केंद्रीय पर्यावरण सचिव की अध्यक्षता में एक्सपर्ट ग्रुप गठित
    • मुख्य सचिव की अध्यक्षता में इम्प्लीमेंटेशन कमेटी ऑन एयर पॉल्यूशन
    • इनोवेशन चैलेंज में
    • 250+ समाधान प्राप्त
    • 52 शॉर्टलिस्ट, IIT, DTU, CSIR द्वारा मूल्यांकन
    • DPCC में 233 रिक्त पदों में से 187 पद 11 महीनों में भरे गए
    • 100 ‘वायु रक्षक’ तैनात

‘सीवियर डेज़’
पिछली सरकार: औसतन 30 दिन
वर्तमान सरकार: 8 दिन

‘सैटिस्फैक्टरी डेज़’
• पहले औसत 70 दिन
• 2025 में 79 दिन

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