पश्चिम बंगाल में एक नाटकीय घटनाक्रम में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ठीक उसी समय राजनीतिक सलाहकार कंपनी आईपैक के प्रमुख प्रतीक जैन के कोलकाता स्थित घर पहुंच गईं जब वहां ईडी की कार्रवाई चल रही थी. वहां पहुंचकर उन्होंने दावा किया कि ईडी ने उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस की हार्ड डिस्क, आतंरिक दस्तावेज़ और संवेदनशील डेटा को ज़ब्त करने की कोशिश की। ममता ने कहा कि टीएमसी का ब्ल्यूप्रिंट लेकर ईडी भाजपा को देना चाहती थी।
Sandhyamidday@नईदिल्ली। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी का ईडी से टकराव हुआ है। दरअसल, पश्चिम बंगाल में अप्रैल-मई तक विधानसभा चुनाव होना है। भाजपा के लिए पश्चिम बंगाल जीतना बड़ी चुनौती है, लेकिन इसी बीच पश्चिम बंगाल में सियासी घटनाक्रम तेज हो गए हैं। भाजपा और ममता के बीच जब-तब टकराव हुआ है, लेकिन ताजा घटनाक्रम विधानसभा चुनावों के कुछ महीने पहले आठ जनवरी गुुरुवार को ममता और ईडी के टकराव का है। ममता पश्चिम बंगाल में ईडी के छापे की प्रक्रिया के दौरान ही राजनीतिक सलाहकार कंपनी आईपैके के प्रमुख प्रतीक जैन के यहां पर पहुंच गई। वहां पहुंचकर उन्होंने दावा किया कि ईडी ने उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस की हार्ड डिस्क, आतंरिक दस्तावेज़ और संवेदनशील डेटा को ज़ब्त करने की कोशिश की। ममता ने कहा कि आप चुनाव लडक़र नहीं जीत सकते तो एजेंसियों का इस्तेमाल कर रहे हैं, अगर अमित शाह को बंगाल जीतना है और उनमें हिम्मत है, तो वे चुनाव लडक़र आएं.
ममता बनर्जी ने प्रतीक जैन को अपनी पार्टी का आईटी चीफ़ बताया और कहा कि उनके घर पर आईडी का छापा राजनीति से प्रेरित और असंवैधानिक है. उन्होंने कहा कि ईडी के लोग तृणमूल कांग्रेस के दस्तावेज और उन हार्ड डिस्क को जब़्त कर रहे थे जिनमें पार्टी के विधानसभा उम्मीदवारों के ब्योरे हैं।
ममता बनर्जी ने कहा कि ईडी के लोग हार्ड डिस्क के साथ ही कई मोबाइल फ़ोन, उम्मीदवारों की लिस्ट और पार्टी के अंदरूनी रणनीतिक दस्तावेज़ शामिल हैं.उन्होंने कहा, मैं उन्हें वापस ले आई हूं. इस पर भाजपा ने कहा है कि अगर पश्चिम बंगाल में छिपाने जैसा कुछ नहीं है, तो एक मुख्यमंत्री आधिकारिक जांच स्थल से फाइलें हासिल करने के लिए क्यों पहुँच रही हैं. भाजपा ने इसे बंगाल के लिए काला दिन बताया है.
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा, मुझे पता चला है कि ईडी की फॉरेंसिक टीम आई थी और उन्होंने कुछ डेटा ट्रांसफर किया. उन्होंने हमारी हार्ड डिस्क, हमारे वित्तीय कागज़ात और राजनीतिक दस्तावेज़ ले लिए. बीजेपी के पास लाखों-करोड़ों की संपत्ति है, लेकिन सीबीआई और ईडी ने कभी उन्हें नहीं पकड़ा.
उन्होंने कहा, मुझे नहीं पता था कि यह सब चल रहा है. मैंने आईपैक चीफ़ प्रतीक जैन को फ़ोन किया, लेकिन उन्होंने फ़ोन नहीं उठाया. बाद में मुझे पता चला कि ईडी ने उनका फ़ोन ज़ब्त कर लिया है. ममता बनर्जी ने कहा, आईपैक हमारे साथ समझौते के तहत काम करती है. किसी भी आईटी सेक्टर से कभी भी डेटा लेना क्या अपराध नहीं है? क्या यह लोकतंत्र की हत्या नहीं है?
ममता बनर्जी ने कहा, अगर आप (बीजेपी) हमसे लड़ नहीं सकते तो बंगाल क्यों आ रहे हैं. लोकतांत्रिक तरीके से हमें हराइए. आप एजेंसियों का इस्तेमाल करके हमारे कागजात, हमारी रणनीति, हमारे वोटर, हमारा डेटा और हमारा बंगाल लूट रहे हैं. ऐसा करके आप जितनी सीटें जीतने वाले थे, वह शून्य हो जाएंगी. उन्होंने कहा, अगर अमित शाह को बंगाल जीतना है और उनमें हिम्मत है, तो वे चुनाव लडक़र आएं.
तृणमूल कांग्रेस के नेता कुनाल घोष ने आरोप लगाया कि बीजेपी ईडी के ज़रिए बंगाल चुनाव में उनकी पार्टी के कैंपेन की योजना का डेटा चुराना चाहती है.
गुरुवार को उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, बीजेपी असली वोटर्स को तंग करने लगी. जब उन्होंने देखा कि सारे तृणमूल वर्कर सडक़ों पर आ गए तो उन्हें लगा कि वोट चोरी फेल हो रही है इसलिए अभी डेटा चोरी की साज़िश की. अगर अभी छापा मारा है तो इतने दिन तक क्यों नहीं कार्रवाई की? आज चुनाव सामने है और आई-पैक हमारे लिए एडवाइजऱी काम कर रहा है. हमारे चुनाव अभियान की सारी प्लानिंग जैसे किस जिलेे में किस गांव में कैसे कैंपेन करनी है, टीम में कौन-कौन है…ये सब चुराने की कोशिश है. ममता बनर्जी और टीएमसी इस डेटा चोरी का विरोध कर रहे हैं. हम किसी जांच के खिलाफ नहीं हैं. अगर ज़रूरी था तो इतने दिन तक छापा क्यों नहीं मारा, चुनाव से ठीक पहले ऐसा क्यों किया? वो लोग टीएमसी का ब्लूप्रिंट बीजेपी को देना चाहते हैं।

