Sandhyamidday@raipur@ इंसानों से दूर, हरी दीवारें और कई किलोमीटर तक की अंधेरी गुफाएं। कहीं-कहीं पर रोशनी और मानव सभ्यता से दूर इतिहास की नई कहानी कहते दीवारों से जागते राज…यह नजारा छत्तीसगढ़ के बस्तर में मिली ग्रीन गुफाओं का है। हजारों साल पुरानी यह गुफाएं अब दुनिया के सामने नजर आई है।
बस्तर की कांगेर घाटी अपनी नैसर्गिक सुंदरता के लिए जाना जाता है. कुटुमसर गुफा की खासियत देश ही नहीं बल्कि विदेश तक मशहूर है.अब इस शानदार वैली में एक नई गुफा की खोज हुई है.इस गुफा को पर्यटक ग्रीन केव के नाम से जानेंगे.इस ग्रीन गुफा ने पर्यटकों के साथ वैज्ञानिकों और प्रकृति प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींचा है.
क्या है ग्रीन गुफा ?
यह एक नई और दुर्लभ गुफा है. जिसकी भव्यता और प्राकृतिक सुंदरता बस्तर के पर्यटन मानचित्र को बदलने की क्षमता रखती है. इस गुफा का सबसे बड़ा आकर्षण इसकी हरी रंगीन दीवारें हैं. जो सूक्ष्मजीवों और चूना पत्थर की संरचनाओं से ढकी हैं. यही विशेषता इसे दूसरी गुफाओं से अलग और विशिष्ट बनाती है. इस गुफा की सुंदरता और संरचना को भारतवर्ष के लोगों तक पहुंचाने लिए ईटीवी भारत की टीम कांगेर वेल्ली में पहुंची और गुफा के भीतर प्रवेश करके उसकी तस्वीरों को सामने लाया. कहां पर है ग्रीन गुफा ?
ग्रीन गुफा बस्तर जिला मुख्यालय जगदलपुर से करीब 45 किलोमीटर दूर कांगेर वेल्ली नेशनल पार्क के कुटुमसर गुफा के पास है. मीडिया टीम घने जंगल और पहाड़ के बीच बने छोटे पगडंडियों के सहारे गुफा तक पहुंची. गुफा का मुहाना काफी खतरनाक था.प्राकृतिक अवस्था में होने के कारण गुफा के अंदर जाने के लिए किसी तरह का निर्माण नहीं कराया गया है.इसलिए हमारी टीम चट्टानों की मदद से गुफा के अंदर तक पहुंची. गुफा में चट्टानों की मदद से उतरना काफी खतरनाक हो सकता था,फिर भी अपने दर्शकों को रोमांचित करने वाला नजारा दिखाना हमारी जिम्मेदारी थी.इसलिए खतरा होने के बाद भी हम काफी कठिनाई से गुफा के अंदर उतरे. बेहद खूबसूरत है गुफा के अंदर का नजारा
नीचे उतरने के बाद ही हरे रंगों से बना चूना पत्थर( स्टेलेक्टाइट) की दीवारें हमारे आंखों के सामने थी. जिसे देखने के बाद ऐसा लगता है कि मानो आप किसी अलग ही दुनिया में आ चुके हैं.चारो ओर सफेद और हरे चमकदार पत्थर आंखों को चकाचौंध कर रहे थे. जो चूना पत्थर की आकृतियां गुफा के अंदर बनी थी,वो एक दो दिन या साल नहीं बल्कि हजारों साल से टपक रही पानी की नैचुरल बूंदों से बनी थी. पानी की बूंदें स्टेलेक्टाइट और स्टेलेक्माइट का निर्माण करती है. यह गुफा अंदर करीब 50-60 मीटर से अधिक लंबी है. जहां अलग-अलग कई चूना पत्थर की आकृतियां नजर आईं. बस्तर में पाए जाने वाले सभी गुफाओं के भीतर चूना पत्थर की बनी आकृतियां एक जैसी ही हैं. गुफा के अंदर का रंग सफेद और चमकदार है. लेकिन ग्रीन गुफा में चूना पत्थर के ऊपर हरे रंग की एक परत चढ़ी हुई है.इसी वजह से इस गुफा ने अपनी अलग पहचान बनाई है. हरे रंग पर जैसे ही टॉर्च की रोशनी पड़ती है उसका रंग और भी ज्यादा खिल उठता है.
गुफा की दीवारों का रंग हरा क्यों ?
गुफा की दीवारों का रंग हरा होने के पीछे का सबसे बड़ा कारण सूर्य की रौशनी है. स्थानीय गाइड सोमरथ कश्यप ने बताया कि चूना पत्थर का ये दीवार गुफा के बिल्कुल मुहाने पर मौजूद हैं. जहां सीधे सूर्य की रौशनी पड़ती है. इस कारण दीवार पर मौजूद पानी और सूर्य के प्रकाश से काई जमने लगती है.दीवार की जिन भी जगहों पर सूर्य की रौशनी पड़ती है वहां पर काई बनने लगती है. कई वर्षों तक लगातार रौशनी पड़ते रहने के कारण काई का फैलाव होता गया है.यही काई चूना पत्थर को हरा रंग देती है. उसके ही नजदीक कई दीवारें मौजूद हैं. लेकिन सूर्य की रौशनी नहीं पड़ने की वजह से उनका रंग सफेद और चमकदार है.

