Sandhyamidday@newdelhi@सोशल मीडिया पर अमेरिका और इराक के बीच हमले के पहले हुई वार्ता की डिटेल अमेरिका साइबर सुरक्षा के रक्षा विश्लेषक की सोशल मीडिया पर पोस्ट से वायरल है। इस सोशल मीडिया की पोस्ट में उन 11 दिनों के बीच की बातचीत का हवाला दिया गया है। पूरी डिटेल लेकर ज्यों की त्यों दी गई है।

अमेरिकी साइबर-सुरक्षा विश्लेषक और डिजिटल सत्ता संरचनाओं के मुखर आलोचक पीटर गिरनस एक्स पर अपनी एक पोस्ट (01 March, 2026, 2:33 AM, 2.8M Views) में लिखते हैं…
“मैं ओमान सल्तनत के विदेश मंत्रालय में एक राजनयिक सहायक हूँ.
मेरा काम लॉजिस्टिक्स है। जब दो देश, जो सीधे एक-दूसरे से बात नहीं कर सकते, बातचीत करना चाहते हैं — तो कमरे मैं बुक करता हूँ. ब्रीफिंग सामग्री तैयार करता हूँ. यह सुनिश्चित करता हूँ कि मेज़ पर रखे पानी के गिलास सही दूरी पर हों.
आपको आश्चर्य होगा कि कूटनीति का कितना हिस्सा पानी के गिलासों पर निर्भर करता है. बहुत पास हों तो माहौल अनौपचारिक लगता है. बहुत दूर हों तो अदालत जैसा. मेरे पास इसकी एक चार्ट है.
हमारा महीना बहुत अच्छा चल रहा था.
जनवरी से ओमान, ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष वार्ताओं की मध्यस्थता कर रहा था. बातचीत मस्कट और जेनेवा में हुई. अमेरिकी एक कमरे में बैठते थे. ईरानी दूसरे कमरे में. और मैं दोनों के बीच आता-जाता रहता था.
मेरे फिटबिट के अनुसार बातचीत वाले दिनों में मैं औसतन चौदह हज़ार कदम चलता था. रॉयल ओपेरा हाउस कॉन्फ़्रेंस सेंटर में दोनों कमरों के बीच का गलियारा सैंतालीस मीटर लंबा है. फरवरी में मैंने उसे दो सौ बारह बार पार किया. यह मेरे हृदय के स्वास्थ्य के लिए अच्छा था. घुटनों के लिए कम अच्छा. दोनों ही शांति की सेवा में थे.
फरवरी के मध्य तक हमारे पास कुछ ठोस था.
ईरान ने संवर्धित यूरेनियम का शून्य भंडारण स्वीकार किया. कम भंडारण नहीं — शून्य.
उन्होंने मौजूदा भंडार को न्यूनतम स्तर तक पतला करने पर सहमति दी.
उसे अपरिवर्तनीय ईंधन में बदलने पर सहमति दी.
पूर्ण IAEA सत्यापन तथा संभावित अमेरिकी निरीक्षक पहुँच पर सहमति दी.
और विदेश मंत्री के शब्दों में — परमाणु बम के लिए सामग्री “कभी नहीं, हरगिज़ नहीं” रखने पर सहमति दी.
मैं सात वर्षों से कूटनीति में हूँ. मैंने कभी किसी देश को इतनी जल्दी इतनी सहमतियाँ देते नहीं देखा.मैंने रियायतों की एक स्प्रेडशीट बनाई. उसमें चौदह पंक्तियाँ थीं. रंगों से चिन्हित — हरा यानी कन्फर्म, पीला मतलब लंबित.
21 फरवरी तक पूरी स्प्रेडशीट हरी हो चुकी थी.
मैंने उसे प्रिंट किया. वह अभी भी मस्कट में मेरी मेज़ पर रखी है.
अब भी हरी.
“कभी नहीं, हरगिज़ नहीं” — इस वाक्यांश को तय करने में ग्यारह दिन लगे.
ईरान पहले “प्रयास नहीं करेगा” चाहता था.
अमेरिका चाहता था — “किसी भी परिस्थिति में नहीं करेगा.”
मंगलवार रात 2:14 बजे, मस्कट में हम “कभी नहीं, हरगिज़ नहीं” पर पहुँचे.
अंतिम दस्तावेज़ मैंने स्वयं टाइप किया.
जेनेवा की पसंद के कारण फ़ॉन्ट टाइम्स न्यू रोमन रखा.
दस्तावेज़ चौदह पन्नों का था.
मुझे हर अल्पविराम पर गर्व था.
अब सुनिए — क्रमवार क्या हुआ.
24 फरवरी :
“यह पीढ़ियों में एक बार मिलने वाला अवसर है.” — विदेश मंत्री, खाड़ी सहयोग परिषद के राजदूतों को निजी ब्रीफिंग.
स्लाइड प्रस्तुति मैंने तैयार की.
स्लाइड 14 — क्रियान्वयन समयरेखा.
स्लाइड 15 — हस्ताक्षर समारोह की व्यवस्था.
जेनेवा के Palais des Nations का कक्ष XX आरक्षित था. 400 लोगों की क्षमता.
हस्ताक्षर के लिए पेन ब्रांड पर चर्चा हुई.
ईरान — मॉन्टब्लांक चाहता था.
अमेरिका — कोई विशेष पसंद नहीं.
मैंने बारह Montblanc Meisterstück पेन ऑर्डर किए — प्रत्येक 630 डॉलर के.
वे मंगलवार को पहुँचने वाले थे.
27 फरवरी, सुबह 8:30 (EST) :
“समझौता हमारी पहुँच में है.” — विदेश मंत्री, CBS Face the Nation कार्यक्रम में.
वे मार्गरेट ब्रेनन के सामने बैठे थे.
उन्होंने कहा — राजनीतिक सहमति “कल” संभव है और तकनीकी क्रियान्वयन के लिए वियना में 90 दिन लगेंगे.
उन्होंने वह पंक्ति कही जो मैंने उनके ब्रीफिंग कार्ड पर लिखी थी —
“यदि हम कूटनीति को बस उतनी जगह दे दें जिसकी उसे आवश्यकता है.”
उन्होंने अमेरिकी दूतों — स्टीव विटकॉफ़ और जैरेड कुशनर — की सराहना की.
मैं फोर सीज़न्स जॉर्जटाउन से देख रहा था.
मिनिबार में काजू थे
मैंने खाए.
कीमत — उन्नीस डॉलर.
मेरे जीवन का सबसे महँगा काजू.
लेकिन वह अच्छी सुबह थी। समझौता हमारी पहुँच में था.
27 फरवरी, दोपहर 2:00 (EST) :
वॉशिंगटन में उपराष्ट्रपति वेंस से बैठक.
शून्य भंडारण। पूर्ण सत्यापन। अपरिवर्तनीय रूपांतरण। “कभी नहीं, हरगिज़ नहीं.”
उपराष्ट्रपति ने शब्द इस्तेमाल किया — “उत्साहजनक.”
उनके सहायक ने iPad पर नोट्स लिये.
अंतिम नौ मिनट उसने आँख नहीं मिलाई.
मैंने ध्यान दिया.
ध्यान देना ही मेरे काम का वह हिस्सा है जो पानी के गिलासों से जुड़ा नहीं.
27 फरवरी, शाम 4:00 (EST) :
राष्ट्रपति ट्रम्प — पत्रकारों से –
“प्रगति की गति से संतुष्ट नहीं.”
संतुष्ट नहीं.
शून्य भंडारण.
पूर्ण IAEA सत्यापन.
अपरिवर्तनीय ईंधन.
निरीक्षक पहुँच.
और “कभी नहीं, हरगिज़ नहीं” — जिसके लिए मैंने सैंतालीस मीटर के गलियारे में दो सौ बारह चक्कर लगाए.
कार्टर के बाद से कोई अमेरिकी राष्ट्रपति यह सहमति नहीं हासिल कर पाया था.
पैंतालीस वर्ष.
फिर भी — संतुष्ट नहीं.
27 फरवरी, रात 9:47 (EST) :
विदेश मंत्री की उड़ान डलेस से मस्कट के लिए रवाना.
मैं उनके पीछे वाली सीट पर हूँ.
वे लैपटॉप पर स्लाइड 14 देख रहे हैं.
समयरेखा.
हस्ताक्षर समारोह.
पेन.
मैं अटलांटिक के ऊपर सो जाता हूँ.
मैं पानी के गिलासों का सपना देखता हूँ.
28 फरवरी, सुबह 6:00 (GST) :
फोन पर आपात सूचनाएँ.
“संयुक्त राज्य अमेरिका ने ईरान में व्यापक सैन्य अभियान शुरू किया है।” — राष्ट्रपति ट्रम्प.
ऑपरेशन Epic Fury।
अमेरिका और इज़राइल के समन्वित हवाई हमले.
तेहरान. इस्फ़हान. क़ोम. करज. केरमानशाह.
परमाणु केंद्र. IRGC ठिकाने.
सुप्रीम लीडर कार्यालय के निकट स्थान.
इज़राइल ने अपने अभियान का नाम रखा — रोरिंग लॉयन.
किसी ने इन नामों पर समय लगाया.
मैंने ग्यारह दिन “कभी नहीं, हरगिज़ नहीं” पर लगाए.
उन्होंने ब्रांडिंग पर लगाए.
राष्ट्रपति ने कहा —
ईरान ने अमेरिकी मांगों को अस्वीकार किया.
अस्वीकार?
ईरान सब कुछ मान चुका था.
उस चौदह पन्नों के दस्तावेज़ में — जिसे मैंने टाइम्स न्यू रोमन में टाइप किया था.
मुझे नहीं पता राष्ट्रपति कौन-सा दस्तावेज़ पढ़ रहे थे.
मुझे पता है मैंने कौन-सा टाइप किया था.
28 फरवरी, 18:45 उतक :
ईरान इंटरनेट कनेक्टिविटी — 4%.
एक पूरा देश अँधेरे में.
चार प्रतिशत कनेक्टिविटी वाले देश से बातचीत नहीं होती.
बमबारी झेल रहे देश से बातचीत नहीं होती.
यह राजनीतिक मत नहीं — लॉजिस्टिक्स का आकलन है.
28 फरवरी :
मीनाब के एक प्राथमिक विद्यालय में चालीस बच्चियों की मृत्यु की सूचना.
इसके लिए मेरे पास कोई व्यवस्था नहीं।
कोई स्लाइड नहीं.
पानी के गिलासों की चार्ट इसमें लागू नहीं होती।
उसी दिन —
लॉकहीड मार्टिन: ऊपर.
नॉर्थ्रॉप ग्रुम्मन: ऊपर.
RTX : ऊपर.
सोना : 5296 डॉलर.
एक निवेश विश्लेषक की रिपोर्ट — “Iran Strikes: Tactical Plays.”
उन्नीस डॉलर का काजू.
630 डॉलर का पेन.
लगता है मैं गलत उद्योग में काम कर रहा था.
रक्षा उद्योग को पानी के गिलास नहीं चाहिए.
उसे ग्यारह दिन नहीं चाहिए.
उसे सिर्फ एक सुबह चाहिए.
इज़राइल ने अपना वायुक्षेत्र और स्कूल बंद किए.
ईरान ने खाड़ी में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागीं.
सुप्रीम लीडर ने “कुचल देने वाले जवाब” की बात कही.
इज़राइली रक्षा मंत्री ने स्थायी आपातकाल घोषित किया.
मैं इन शब्दों को पहचानता हूँ —
“स्थायी.”
“आपातकाल.”
कूटनीति में कुछ भी स्थायी नहीं होता और सब कुछ आपात होता है.
युद्ध में — इसका उल्टा होता है.
विदेश मंत्री ने अब तक कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है.
ब्रीफिंग कार्ड अब भी उनकी जेब में है।
उस पर अब भी लिखा है —
“समझौता हमारी पहुँच में है।”
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