The Madhya Pradesh government’s budget is a budget of false figures and empty promises. The public has been deceived: Umang Singhar
मध्यप्रदेश सरकार का बजट झूठे आंकड़ों और खोखले वादों का बजट है। जनता के साथ छलावा किया गया: उमंग सिंघार
sandhyamidday@bhopal@मध्यप्रदेश विधानसभा में वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा जी द्वारा प्रस्तुत बजट पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कड़ा और तथ्यात्मक हमला बोलते हुए इसे झूठे आंकड़ों और खोखले वादों का बजट बताया। उन्होंने कहा कि यह बजट प्रदेश की जनता के साथ छलावा है और जमीनी हकीकत से पूरी तरह कटा हुआ है।
प्रमुख बिंदु:
1. रिकॉर्ड राजकोषीय घाटा, फिर भी योजनाओं की लंबी फेहरिस्त
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि वित्तमंत्री स्वयं स्वीकार कर रहे हैं कि राजकोषीय घाटा 74 हजार करोड़ रुपये से अधिक होगा। जब सरकार के पास संसाधन ही नहीं हैं, तो घोषित योजनाओं को पूरा करने के लिए पैसा कहां से आएगा? यह बजट सिर्फ घोषणाओं का पुलिंदा है।
2. किसानों की आय दुगनी पर मौन
किसानों की आय दुगनी करने का वादा किया गया था, लेकिन बजट में इस पर कोई स्पष्ट नीति, योजना या समयसीमा नहीं है। किसान आज भी लागत और कर्ज के बोझ तले दबा है। जो MSP के वादे किए गए थे वो भी पूरे नहीं हुए।
3. युवाओं की नौकरी और भर्ती पर चुप्पी
प्रदेश के लाखों बेरोजगार युवाओं को उम्मीद थी कि भर्ती, नई नौकरियों और रोजगार सृजन पर ठोस प्रावधान होंगे, लेकिन बजट में इस पर कोई ठोस घोषणा नहीं की गई। संविदा भर्ती की बात कही गयी है इससे नौकरी पाने वाले पर हमेशा तलवार लटकी रहेगी।
4. कर्मचारियों के महंगाई भत्ते पर कोई निर्णय नहीं
प्रदेश के कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी को लेकर बजट में कोई प्रावधान नहीं है। यह कर्मचारियों के साथ अन्याय है।
5. नर्मदा किनारे वृक्षारोपण—पैसा नहीं, फिर भी घोषणा
नर्मदा किनारे 5 हजार हेक्टेयर में वृक्षारोपण की बात की जा रही है। जब वित्तीय स्थिति कमजोर है तो यह योजना कैसे लागू होगी? पिछली बार भी मां नर्मदा के नाम पर करोड़ों का घोटाला हुआ था, इस बार भी वैसी ही आशंका है।
6. बिजली दरों में राहत नहीं
बिजली की दरें कम करने पर कोई घोषणा नहीं की गई। आम जनता महंगे बिलों से परेशान है, लेकिन सरकार ने राहत देने की कोई मंशा नहीं दिखाई।
7. अडानी को लाभ, जनता को बोझ
एक तरफ प्रदेश के संसाधन निजी हाथों में सौंपे जा रहे हैं और अडानी जैसे उद्योगपतियों को करोड़ों रुपये दिए जा रहे हैं, दूसरी ओर आम जनता को बिजली बिल में राहत नहीं दी जा रही। सरकार की प्राथमिकताएं साफ हैं—जनता नहीं, उद्योगपति पहले।
8. विधायक निधि बढ़ाने की मांग की अनदेखी
विधायकों की मांग थी कि विधायक निधि 2 करोड़ रुपये और बढ़ायी जाए ताकि वे अपने क्षेत्र में विकास कार्य करा सकें। इस मांग की अनदेखी कर सरकार ने न सिर्फ विधायकों बल्कि विधानसभा अध्यक्ष की भावना का भी अपमान किया है।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि यह बजट विकास का नहीं, भ्रम का दस्तावेज है। इसमें झूठे आंकड़े पेश कर जनता को गुमराह करने की कोशिश की गई है। प्रदेश की जनता इस छलावे को समझ चुकी है और समय आने पर जवाब देगी।
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