किसके मतदाता कटे ये बड़ा सवाल, भाजपा को भी अपने समर्थकों की चिंता सताई, अभी तक केवल कांग्रेस व अन्य विपक्षी दल आरोप लगा रहे थे, अब भाजपा में भी बड़ी संख्या में नाम कटने से असमंजस
Sandhyamidday@लखनऊ। उत्तरप्रदेश में 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम कट गए हैं। इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम कटने से जहां कांग्रेस, सपा और अन्य विपक्षी दल आरोप लगा रहे हैं, तो अब भाजपा में भी चिंता की लकीरें हैं। 2.89 करोड़ मतदाता के नाम हटने से भाजपा को भी ये चिंता सताई है कि कहीं उसके समर्थकों के भी नाम तो नहीं कट गए। इसके चलते अब कांग्रेस, सपा व अन्य दलों के बाद भाजपा भी एसआईआर में कटे नामों को लेकर अपने स्तर पर मतदाताओं को जागरूक करने, मतदाताओं के कटे नामों को क्रास-चेक करने और मैदानी परीक्षण में जुट रही है। कुल मिलाकर एसआईआर अब हर दल के लिए चिंता का सबब बन गया है। इसका असर आगे दिख सकता है।
क्या है मामला
उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद 6 जनवरी को निर्वाचन आयोग ने ड्राफ़्ट मतदाता सूची जारी कर दी है. इस सूची में राज्य के 12 करोड़ 55 लाख से अधिक मतदाता दर्ज किए गए हैं. यह संख्या पिछली मतदाता सूची के मुक़ाबले कऱीब 2 करोड़ 89 लाख कम है.
कितने मृत, कितने पलायन, कितने डुप्लीकेट
निर्वाचन आयोग के मुताबिक़, इनमें 46.23 लाख मतदाता मृत पाए गए हैं, जबकि 2.17 करोड़ मतदाता स्थानांतरित हो चुके हैं या तो स्थायी रूप से कहीं और जा चुके हैं. कटे हुए नामों में 25.47 लाख नाम डुप्लीकेट पाए गए हैं, यानी एक ही व्यक्ति का नाम एक से अधिक स्थानों पर मतदाता सूची में दर्ज था.निर्वाचन आयोग के मुताबिक़, 2025 की मतदाता सूची में तकऱीबन 15 करोड़ 44 लाख मतदाता दर्ज थे.
प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने कहा, स्पेशल इंटेंसिव रिवीजऩ से जुड़े गणना प्रपत्र (फॉर्म) प्राप्त कर लिए गए हैं.उन्होंने कहा, ड्राफ़्ट मतदाता सूची जारी होने के बाद मतदाताओं को एक महीने का समय दिया गया है. इस अवधि में नाम जोडऩे, संशोधन कराने और आपत्ति दर्ज कराने के लिए आवेदन किया जा सकता है चुनाव आयोग के मुताबिक़, ड्राफ़्ट सूची में जिन लोगों की मैपिंग नहीं हो पाई है, उन्हें आयोग की ओर से नोटिस भेजा जाएगा.
ऐसे मतदाताओं की संख्या एक करोड़ से अधिक है. विपक्षी दलों का कहना है कि अगर समय रहते लोगों ने दावा नहीं किया, तो वे मतदान से वंचित हो सकते हैं. उत्तर प्रदेश के सभी 75 ज़िलों के आंकड़े जारी कर दिए गए हैं. इनमें सबसे अधिक वोटों की कटौती लखनऊ में हुई है. राजधानी लखनऊ में लगभग 12 लाख नाम कटे हैं, जो कऱीब 30 प्रतिशत मतदाताओं के बराबर हैं. इसमें सबसे अधिक नाम कैंट विधानसभा क्षेत्र में कटे हैं.
लखनऊ में अक्तूबर, 2025 में 39 लाख 94 हज़ार मतदाता थे जो अब घटकर 28 लाख के कऱीब रह गए हैं. लखनऊ की रहने वाली सुधा निगम की उम्र कऱीब 70 वर्ष है. उनके परिवार में चार सदस्य हैं. वे वर्ष 2014 से लखनऊ पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में मतदान कर रहे थे. उनका नाम ड्राफ़्ट सूची में मैप नहीं हो पाया है. अब उन्हें एक महीने के भीतर दावा प्रस्तुत करना होगा.
मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार दावे और आपत्तियाँ दर्ज कराने की अवधि 6 जनवरी से 6 फऱवरी 2026 तक तय की गई है. जबकि 6 जनवरी से 27 फऱवरी 2026 तक नोटिस अवधि के दौरान प्राप्त सभी दावों और आपत्तियों का निस्तारण किया जाएगा. हालाँकि दावे और आपत्तियों का निस्तारण अब बीएलओ से ऊपर के अधिकारी करेंगे. आयोग का दावा है कि किसी भी योग्य मतदाता का नाम अंतिम सूची से बाहर नहीं रहने दिया जाएगा.
प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने कहा, जिन मतदाताओं का नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं है, वे फॉर्म-6 भरकर नाम जुड़वा सकते हैं. आयोग ने एएसडीडीआर की लिस्ट दी है. इनमें अनुपस्थित, दूसरी जगह शिफ्ट होने वाले, मृत्यु और डुप्लीकेट वोटर्स की लिस्ट है.”ऐसे लोग फॉर्म 6 के तहत आवोदन दे सकते हैं. उन्होंने बताया कि नाम या पते में सुधार के लिए फ़ॉर्म-8 और ग़लत नाम हटाने के लिए फ़ॉर्म-7 भरकर ऑनलाइन या बीएलओ को दिया जा सकता है. रिणवा ने कहा, मतदाता ड्राफ़्ट सूची में अपना नाम अवश्य जांचें और किसी भी तरह की त्रुटि या नाम छूटने की स्थिति में एक महीने के भीतर दावा प्रस्तुत करें।

