Sandhyamidday@lakhnau/Newdelhi@ माघ मेले में पालकी ले जाने से रोकने के बाद उपजा शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का विवाद अब नया मोड़ ले चुका है। धरने के पांचवें दिन स्वामी की तबीयत बिगड़ गई। इसी दौरान उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ और सपा प्रमुख अखिलेश यादव के बीच सियासी तकरार भी बढ़ गई है। पूरे मामले में स्वामी शंकराचार्य शंकराचार्य राजनीति में घिरे नजर आ रहे हैं।
माघ मेले में पालकी पर जाने से रोके गए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का धरना जारी है. तबीयत भी बिगड़ रही है, और विवाद थम नहीं रहा है. असल में, वो धर्म और राजनीति के घालमेल के शिकार हैं, और जब तक अपना स्टैंड पर फोकस नहीं करते ये सिलसिला चलता रहेगा।
धरने का 5वां दिन, तबीयत बिगड़ी
18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती संगम में स्नान के लिए पहुंचे थे, लेकिन मेला प्रशासन ने पालकी पर सवार होकर जाने से रोक दिया. फिर पुलिस और उनके समर्थकों के बीच धक्का-मुक्की हुई, वो नाराज होकर धरने पर बैठ गए. धरने के पांचवें दिन अविमुक्तेश्वरानंद की तबीयत बिगड़ी हुई बताई जा रही है. उनके शिष्यों का कहना है कि वो सुबह से ही वैनिटी वैन से बाहर नहीं आए हैं. अंदर लेटे हैं, उन्हें तेज बुखार है. वसंत पंचमी पर भी उन्होंने संगम स्नान भी नहीं किया.
अविमुक्तेश्वरानंद का कहना है कि जब तक प्रशासन माफी नहीं मांगता, तब तक वो स्नान नहीं करेंगे. कहते हैं, प्रशासन नोटिस-नोटिस खेल रहा है… अभी मेरा मौनी अमावस्या का स्नान नहीं हुआ है, तो मैं वसंत का स्नान कैसे कर लूं?
बता दें, अविमुक्तेश्वरानंद की तरफ से उनके वकील ने नोटिस का जवाब दे दिया है. 8 पेज के जवाब में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश उन पर लागू नहीं होता, क्योंकि आदेश जारी होने के दो दिन पहले ही उनका पट्टाभिषेक हो चुका था.
माघ मेले में पालकी पर सवार होकर जाने से रोके जाने पर विवाद के बाद समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने अविमुक्तेश्वरानंद से बात की थी. अखिलेश यादव का कहना था, किसी भी साधु-संत का अपमान होगा तो समाजवादी पार्टी उसके विरोध में खड़ा रहेगी – और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तरफ से तीखे रिएक्शन के लिए इतना काफी था.
हरियाणा में एक प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम के दौरान योगी आदित्यनाथ का कहना था, एक योगी के लिए, संन्यासी के लिए, संत के लिए… धर्म और राष्ट्र से बढ़कर कुछ नहीं हो सकता… उसकी निजी संपत्ति कुछ नहीं होती, धर्म और राष्ट्र ही उसका स्वाभिमान है… ऐसे कई कालनेमि होंगे जो धर्म की आड़ में सनातन धर्म को कमजोर करने की साजिश रच रहे होंगे… हमें उनसे सावधान और सतर्क रहना होगा.
अविमुक्तेश्वरानंद ने भी योगी आदित्यनाथ के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. कहा है, कालनेमि का मतलब है कि जो नहीं है, वो बनकर दिखाए… जब आप राजनेता हो, मुख्यमंत्री बने हो, तो अपने आप को धर्माचार्य क्यों दिखा रहे हो? कालनेमि तो वही सिद्ध होते हैं… कोई व्यक्ति एक समय एक ही चीज हो सकता है, दो चीजें तो नहीं हो सकतीं. कोई व्यक्ति मुख्यमंत्री और धर्माचार्य तो नहीं हो सकता है.
मामला ये है कि अखिलेश यादव की सहानुभूति लेकर, अविमुक्तेश्वरानंद ने बीजेपी और योगी आदित्यनाथ से बैर मोल लिया – और एक झटके में संघ के निशाने पर भी आ गए हैं.
अविमुक्तेश्वरानंद, शंकराचार्य रहे स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य हैं. स्वरूपानंद सरस्वती भी अपने राजनीतिक बयानों की वजह से विवादों में रहा करते थे. और, अविमुक्तेश्वरानंद भी मौजूदा राजनीति में धीरे धीरे पक्षकार बनते जा रहे हैं. कोई भी हो, जाहिर है, एक पक्ष का होने पर उसे दूसरे पक्ष के निशाने पर तो स्वाभाविक रूप से आना ही होगा.
एक जमाने में शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती के बयानों में कांग्रेस के प्रति सहानुभूति का भाव महसूस किया जाता था, लेकिन अविमुक्तेश्वरानंद तो राहुल गांधी के हिंदुत्व पर भी सवाल उठा चुके हैं. और अब योगी आदित्यनाथ को भी कठघरे में खड़ा कर दे रहे हैं. मुश्किल तो ये है कि अविमुक्तेश्वरानंद को न धर्म का सपोर्ट मिल पा रहा है, न मजबूत राजनीतिक समर्थन। और जो भी विवाद हो रहा है।

