खरगे की रैली के बाद भाजपा-आरएसएस कार्यकर्ताओं द्वारा किया गया था शुद्धिकरण
http://’Purification’ of the stage is a crime; an FIR must be registered immediately – Rahul Gandhi
20 दिन बाद भी एफआईआर दर्ज न होने पर जताई नाराजगी
Sandhyamidday@नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद भाजपा-आरएसएस के कार्यकर्ताओं द्वारा मंच का ‘शुद्धिकरण’ किए जाने को छुआछूत और एससी-एसटी एक्ट के तहत दंडनीय अपराध करार देते हुए दोषियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि शुद्धिकरण छुआछूत का ही दूसरा नाम है, जिसके माध्यम से भाजपा-आरएसएस संदेश दे रहे हैं कि दलित को छूना नहीं चाहिए और दलित गंदे हैं।
घटना के 20 दिन बाद भी एफआईआर दर्ज न होने पर कड़ी नाराजगी जताते हुए राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दलित विरोधी विचारधारा साफ दिखाई दे रही है। यह केवल कांग्रेस अध्यक्ष का अपमान नहीं, बल्कि देश के हर दलित के सम्मान से जुड़ा मामला है और भाजपा-आरएसएस की दलित-विरोधी मानसिकता को उजागर करता है। उन्होंने साफ कहा कि यदि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो कांग्रेस पार्टी उन्हें बचकर निकलने नहीं देगी और न्याय सुनिश्चित करेगी।
इंदिरा भवन में पत्रकार वार्ता करते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बताया कि 08 अगस्त को कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की उत्तराखंड के हल्द्वानी में रैली हुई थी, जिसके बाद 10 अगस्त को भाषण मंच का शुद्धिकरण किया गया। 13 अगस्त को खरगे ने संसद में अपने इस अपमान का मुद्दा उठाया। राहुल गांधी ने कहा कि शुद्धिकरण का मतलब छुआछूत है, जो एससी-एसटी एक्ट के तहत अपराध है, लेकिन 20 दिन बाद भी मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने मांग की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मामले में एससी-एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई के आदेश दें।
राहुल गांधी ने कहा कि एक तरफ नरेंद्र मोदी खुद को हर जाति का बताते हैं, लेकिन उन्हीं की पार्टी के उत्तराखंड अध्यक्ष महेंद्र भट्ट शुद्धिकरण को सही ठहरा रहे हैं। उन्होंने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि मंच का शुद्धिकरण भाजपा-आरएसएस की मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों नहीं चाहते कि देश के दलित प्रगति करें और सम्मान के साथ जिएं।
नेता प्रतिपक्ष ने जोर देकर कहा कि जब देश के इतने बड़े वरिष्ठ नेता के साथ खुलेआम ऐसा किया जा सकता है, तो आम दलित की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह कांग्रेस के लिए स्वीकार्य नहीं है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बसपा सुप्रीमो मायावती की इस मामले पर चुप्पी को लेकर पूछे गए सवाल पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री की चुप्पी उनकी वैचारिक सोच को दर्शाती है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें किसी के बयान में कोई दिलचस्पी नहीं है, वह सिर्फ इस मामले में कानूनी कार्रवाई चाहते हैं।
राहुल गांधी ने यह भी कहा कि एक दलित व्यक्ति जितना सफल होता है, उसपर उतनी ही ताकत से आक्रमण होता है। उन्होंने कहा कि ऐसा रोजाना देश के करोड़ों लोगों के साथ होता है। उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि राजस्थान में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के मंदिर में जाने के बाद भाजपा नेता ने वहां शुद्धिकरण किया। इसी तरह बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के मंदिर में प्रवेश करने के बाद शुद्धिकरण किया गया।
पत्रकार वार्ता के दौरान वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने मंच की स्क्रीन पर संविधान और मनुस्मृति की प्रतियां दिखाते हुए कहा कि आज देश में दो विचारधाराओं के बीच लड़ाई चल रही है। एक तरफ संविधान है और दूसरी तरफ भाजपा-आरएसएस की विचारधारा है। उन्होंने कहा कि हजारों वर्षों से दलितों पर अत्याचार हो रहा है। आज संविधान लागू होने के बाद भी उनके साथ हिंसा की जा रही है, जो गैरकानूनी है। उन्होंने कहा कि देश के कई स्कूलों में दलित बच्चों से टॉयलेट साफ कराया जाता है, उनसे झाड़ू लगवाई जाती है। दलितों को कुओं से पानी नहीं लेने दिया जाता। इतना ही नहीं, चाय की दुकानों पर भी दलितों के साथ भेदभाव होता है। बारात में घोड़े पर चढ़ने को लेकर उन्हें मारा-पीटा और धमकाया जाता है।
इससे पहले कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पार्टी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि दलितों और आदिवासियों का अपमान किया जा रहा है; घड़ा छूने, मूंछ रखने या मूर्ति छूने पर भी उनके साथ अत्याचार होता है।

