देशभर के निफ्ट में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले 10 विद्यार्थियों को राष्ट्रपति ने दिया स्वर्ण पदक
केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने विद्यार्थियों को कहा कि बड़े सपने देखो और कड़ी मेहनत करो
Sandhyamidday@ नई दिल्ली@राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को देश भर के 18 निफ्टी के संयुक्त दीक्षांत समारोह में शिरकत की। यहां राष्ट्रपति ने कहा कि युवा विद्यार्थियों को अपनी जड़ों और संस्कृति से जुड़े रहकर वैश्विक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। राष्ट्रपति ने समारोह में देशभर के निफ्ट में बेहतर प्रदर्शन करने वाले 10 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक भी प्रदान किया। कार्यक्रम में केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने भी शिरकत की। गिरिराज ने विद्यार्थियों को कहा कि बड़े सपने देखो और उनके लिए कड़ी मेहनत करो।
यह दीक्षांत समारोह सोमवार को दिल्ली के यशोभूमि क्षेत्र में हुआ। यहां पर राष्ट्रपति ने कहा कि टेक्सटाइल और अपैरल सेक्टर सिर्फ हमारी कल्चरल विरासत का हिस्सा ही नहीं है, बल्कि यह लाखों लोगों की रोजी-रोटी की रीढ़ भी रहा है। अगर पारंपरिक कारीगरों को सपोर्ट और गाइडेंस मिले, तो इससे उनकी अगली पीढ़ियों को गर्व और कॉन्फिडेंस के साथ इस प्रोफेशन में लगे रहने की हिम्मत मिलेगी।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (निफ्ट) के दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति ने कहा कि अगर पारंपरिक कारीगरों को सहयोग और मार्गदर्शन मिले, तो इससे उनकी अगली पीढ़ियां गर्व और आत्मविश्वास के साथ इस पेशे से जुड़ी रहने के लिए प्रोत्साहित होंगी। उन्हें यह जानकर खुशी हुई कि निफ्ट के अलग-अलग सेंटर्स ने ‘क्राफ्ट क्लस्टर इनिशिएटिव’ जैसे प्रोग्राम शुरू किए हैं, ताकि अपने-अपने इलाकों के बुनकरों और कारीगरों को टेक्सटाइल और कपड़ों के सेक्टर की आधुनिक तकनीकों से परिचित कराया जा सके और उन्हें बाज़ारों से जोड़ा जा सके। राष्ट्रपति ने कहा कि आज हमारा देश पहले से कहीं ज़्यादा आत्मविश्वास के साथ ग्लोबल मंच पर अपनी भूमिका बढ़ा रहा है। फैशन टेक्नोलॉजी भी एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें भारत की ग्लोबल पहचान को बढ़ाने की अपार संभावनाएं हैं।
उन्होंने ग्रेजुएट हो रहे छात्रों से इस मौके का फायदा उठाने को कहा। उन्होंने कहा कि इस कोशिश में छात्रों को ग्लोबल नज़रिए के साथ-साथ अपनी जड़ों और हमारी संस्कृति के मूल मूल्यों से भी मजबूती से जुड़े रहना चाहिए। ऐसा करने से वे न केवल सफल प्रोफेशनल बनेंगे, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत को बचाने और उसे समृद्ध करने में भी योगदान देंगे।

