गृहमंत्री का राहुल गांधी पर सीधा हमला, भीड़ और मीडिया की सुर्खियों से नहीं मिलता जनादेश, कांग्रेस पहले अपनी चुनावी जमीन तलाशे
sandhyamidday@नई दिल्ली।केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राहुल गांधी पर सीधा हमला बोला है। शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को अपनी हार का बहाना बनाकर भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता पर सवाल उठा रही है। उन्होंने दावा किया कि 2029 के लोकसभा चुनाव में भी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) भारी बहुमत से सत्ता में लौटेगा और कांग्रेस को लगातार चौथी हार का सामना करना पड़ेगा।
शाह के बयान का राजनीतिक संदेश साफ है,भाजपा अब कांग्रेस को केवल चुनावी प्रतिद्वंद्वी के रूप में नहीं, बल्कि अपनी हार की वजहों का सामना करने से बचने वाली पार्टी के रूप में पेश करना चाहती है। इसके लिए उन्होंने गुजरात से लेकर त्रिपुरा तक के चुनावी आंकड़ों को कांग्रेस के खिलाफ हथियार बनाया।
गुजरात के आंकड़ों से कांग्रेस को घेरा
शाह ने गुजरात के स्थानीय निकाय चुनावों का हवाला देते हुए कहा कि तीन निकायों की 104 सीटों में भाजपा ने 90 सीटें जीतीं। गांधीनगर नगर निगम की 44 सीटों में से 38 पर भाजपा का कब्जा रहा। उनके मुताबिक, गांधीनगर में पार्टी का मत प्रतिशत पिछले चुनाव की तुलना में 10 प्रतिशत बढ़ा।
शाह ने आम आदमी पार्टी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उसने सभी 32 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन हर सीट पर उसकी जमानत जब्त हो गई। भाजपा के पक्ष में इन आंकड़ों को रखते हुए उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया कि पार्टी अपनी लगातार चुनावी चुनौतियों की समीक्षा करने के बजाय एसआईआर को जिम्मेदार क्यों ठहरा रही है।
त्रिपुरा के नतीजों से राहुल गांधी पर निशाना
गृह मंत्री ने त्रिपुरा की ग्राम समितियों के चुनावों का उल्लेख करते हुए एनडीए को करीब 4,000 सीटें और 77.5 प्रतिशत वोट मिलने का दावा किया। उनके अनुसार, कांग्रेस 4,600 सीटों में से केवल 14 सीटें जीत सकी।
शाह ने राजस्थान के निकाय चुनावों का भी जिक्र किया और कहा कि गुजरात, त्रिपुरा तथा दूसरे राज्यों में भाजपा और एनडीए के प्रदर्शन को केवल मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। उन्होंने सवाल उठाया कि जब एसआईआर से पहले भी कांग्रेस कई राज्यों में सत्ता से दूर रही है, तो पार्टी अपनी राजनीतिक कमजोरी की जिम्मेदारी किसे देगी?
‘मीडिया की सुर्खियों से नहीं मिलता जनता का भरोसा’
राहुल गांधी की राजनीतिक शैली पर हमला करते हुए शाह ने कहा कि मीडिया कार्यक्रमों और भीड़ जुटाने से जनता का भरोसा नहीं जीता जा सकता। कांग्रेस को गांवों, खेतों, पहाड़ी क्षेत्रों, जंगलों और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करनी होगी।
शाह ने कांग्रेस पर एसआईआर के मुद्दे की आड़ में घुसपैठियों को बचाने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया। यह आरोप राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि मतदाता सूची का पुनरीक्षण, पात्र मतदाताओं के अधिकार और अवैध घुसपैठ का मुद्दा आने वाले समय में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव का प्रमुख विषय बन सकता है।
2029 की लड़ाई अभी से शुरू
शाह का 2029 में एनडीए की जीत का दावा केवल भविष्यवाणी नहीं, बल्कि विपक्ष पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की राजनीतिक रणनीति के तौर पर भी देखा जा सकता है। भाजपा इन स्थानीय चुनावों को अपने समर्थन का प्रमाण बता रही है, जबकि कांग्रेस की चुनौती यह होगी कि वह मतदाता सूची के मुद्दे को उठाने के साथ-साथ अपने संगठन, नेतृत्व और चुनावी प्रदर्शन पर भी जनता के सामने ठोस जवाब रखे।

