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Tuesday, October 13, 2026
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जरूरत पड़ी तो दो साल भी लड़ेंगे, वोट चोरी का हिसाब लेकर रहेंगे – राहुल गाँधी

अलग अलग विरोध नहीं, साँझा आंदोलन

http://We will fight for even two years if necessary; we will hold them accountable for the theft of votes – Rahul Gandhi.

लोकतंत्र की बहाली तक पीछे हटने को तैयार नहीं विपक्ष; जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की पाबंदी को अदालत में चुनौती देने की तैयारी, साझा आंदोलन से सरकार पर दबाव बढ़ाने की रणनीति

sandhyamidday@नई दिल्ली। वोट चोरी के आरोपों पर अब आर-पार की लड़ाई के संकेत देते हुए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को खुली राजनीतिक चुनौती दी है। राहुल ने कहा कि यह संघर्ष आज, कल या परसों खत्म होने वाला नहीं है। जरूरत पड़ी तो विपक्ष दो साल बाद भी आंदोलन जारी रखेगा। उनका दावा है कि लड़ाई का लक्ष्य सिर्फ चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों का विरोध करना नहीं, बल्कि देश में लोकतंत्र की बहाली है। राहुल के इस बयान से साफ है कि कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मुद्दे को लंबे राजनीतिक संघर्ष में बदलने की तैयारी में हैं। दरअसल, राहुल गांधी ने अपने निवास पर विपक्ष के नेताओं को चाय पर चर्चा के लिए बुलाया था। इस दौरान बैठक की गई और आगे की रणनीति पर चर्चा हुई।

राहुल गांधी के आवास पर इंडिया गठबंधन के सांसदों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों की बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के साथ मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि यह अलग-अलग दलों के अलग-अलग प्रदर्शन नहीं हैं, बल्कि एक साझा आंदोलन है। राहुल ने आरोप लगाया कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और चुनाव प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाया गया है तथा संविधान की भावना को कमजोर किया जा रहा है। हालांकि, वोट चोरी के आरोपों को लेकर चुनाव आयोग और संबंधित पक्षों का जवाब भी इस बहस का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

चुनाव से सड़क तक, लंबी लड़ाई का संकेत

राहुल ने आंदोलन की अगली रणनीति सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि यदि आगे की पूरी योजना बता दी गई तो विरोध की रणनीति पहले ही उजागर हो जाएगी। उन्होंने विपक्षी दलों के बीच एकजुटता का दावा करते हुए कहा कि जिस ऊर्जा और ताकत के साथ लोगों को जोड़ा गया है, उसी तरह आगे भी संघर्ष जारी रहेगा।

इस बयान का राजनीतिक महत्व इसलिए है क्योंकि कांग्रेस अब एसआईआर को केवल चुनावी प्रक्रिया से जुड़ा विवाद बनाकर नहीं रखना चाहती। पार्टी इसे मतदाता के अधिकार, चुनाव की निष्पक्षता और लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही से जोड़कर व्यापक जनआंदोलन का मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है।

जंतर-मंतर पर रोक को भी बनाएंगे मुद्दा

राहुल ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की सीमाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह स्थान लंबे समय से लोकतांत्रिक विरोध का माध्यम रहा है। उन्होंने वहां प्रदर्शन की गुंजाइश सीमित किए जाने के फैसले को चुनौती देने की बात कही। इससे विपक्ष की लड़ाई का दायरा मतदाता सूची के विवाद से आगे बढ़कर राजधानी में विरोध प्रदर्शन के अधिकार तक पहुंचता दिखाई दे रहा है।

राहुल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कथित वोट चोरी का मुख्य योजनाकार, गृह मंत्री अमित शाह को इसे लागू करने वाला और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार सहित अन्य लोगों को जिम्मेदार ठहराया। ये राहुल गांधी के राजनीतिक आरोप हैं; इन्हें सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि संबंधित लोगों को जवाबदेह बनाया जाएगा।

खरगे का दावा—अब आम लोग भी जुड़ रहे

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने दिल्ली में बड़ी संख्या में लोगों के जुटने को आंदोलन की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उनके मुताबिक, युवाओं और आम नागरिकों की भागीदारी से यह मुद्दा राजनीतिक दलों के दायरे से बाहर जा रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि आंदोलन का अगला कार्यक्रम घोषित किया जाएगा।

अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने भी आंदोलन को व्यापक बनाने की बात कही। उनके अनुसार, किसान, मजदूर, छात्र और दूसरे सामाजिक वर्गों को भी एसआईआर के खिलाफ संघर्ष से जोड़ा जाएगा।

सरकार के सामने विपक्ष की नई चुनौती

राहुल गांधी के बयान से विपक्ष की रणनीति के तीन प्रमुख संकेत मिलते हैं—आंदोलन को लंबा खींचना, अलग-अलग विपक्षी दलों को साझा मंच पर बनाए रखना और मतदाता सूची के मुद्दे को आम नागरिकों के अधिकारों से जोड़ना। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की सीमाओं को चुनौती देने का ऐलान भी इसी रणनीति का हिस्सा है।

अब सवाल यह है कि विपक्ष अपने आरोपों के समर्थन में कौन-से ठोस प्रमाण सामने रखता है और आंदोलन को चुनावी राजनीति से आगे कितनी व्यापक जनभागीदारी मिलती है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग की जिम्मेदारी होगी कि मतदाता सूची की शुद्धता, नाम जोड़ने-काटने की प्रक्रिया और शिकायतों के निपटारे को लेकर उठ रहे सवालों का पारदर्शी जवाब दे।

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