पक्ष में 298 और विपक्ष में 230 वोट पड़े
sandhyamidday@newdelhi@संसद में महिला आरक्षण पर शह-मात के खेल में शुक्रवार को पक्ष और विपक्ष में जमकर तकरार हुई। लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन बिल से संबंधित 131वां संविधान संशोधन विधेयक पास नहीं हो सका है। इस विधेयक पर दो दिनों तक लगातार चर्चा हुई। इसके बाद शुक्रवार शाम हुई वोटिंग में यह विधेयक गिर गया है। इस संशोधन विधेयक के पक्ष में 298 सांसदों ने वोट किया, जबकि विरोध में 230 वोट पड़े। इसके बाद महिला आरक्षण पर पक्ष-विपक्ष में संसद के बाहर सड़क पर भी टकराव की रणनीति बनती रही। भाजपा की महिला सांसदों संसद के मकर द्वार पर प्रदर्शन भी किया। देश में कई जगह भाजपा सांसदों ने रैली भी निकाली।
राहुल गांधी ने किया पोस्ट
विधेयक गिरने के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक्स पर एक पोस्ट किया, जिसमें लिखा, संशोधन विधेयक गिर गया। उन्होंने महिलाओं के नाम पर, संविधान को तोड़ने के लिए, असंवैधानिक तरकीब का इस्तेमाल किया। भारत ने देख लिया। INDIA ने रोक दिया। जय संविधान।
किरेण रिजिजू ने क्या कहा
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि संविधान संशोधन विधेयक के पारित नहीं होने के बाद अब इससे संबंधित दोनों विधेयकों ‘परिसीमन विधेयक, 2026’ और ‘संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026’ को आगे नहीं बढ़ा सकते।
संविधान पर हमले को हरा दिया- राहुल गांधी
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मीडिया से बातचीत में कहा, “यह संविधान पर आक्रमण था और इसे हमने हरा दिया है तो यह अच्छी बात है। हमने स्पष्ट रूप से कहा है कि यह महिला बिल नहीं है, यह हिंदूस्तान का जो राजनीतिक ढांचा है, चुनावी ढांचा है, उसे बदलने की कोशिश है। यह हमने रोक दिया है। मैं प्रधानमंत्री से कह रहा हूं कि अगर आप महिला आरक्षण चाहते हैं तो 2023 का महिला आरक्षण बिल निकालिए, उसका क्रियान्वयन आज से करिए और पूरा विपक्ष 100% आपको समर्थन देगा और महिला आरक्षण को हम तत्काल लागू कराएंगे।
ऐसे जाने क्या खास
नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण विधेयक) लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% (एक-तिहाई) सीटें आरक्षित करने का एक ऐतिहासिक कानून है
सितंबर 2023 में पारित यह कानून (128वां संविधान संशोधन) राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से लाया गया है, जो 2029 तक लागू होने की संभावना है
नारी शक्ति वंदन अधिनियम के मुख्य बिंदु:
आरक्षण का दायरा: यह कानून लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए 33% सीटें सुरक्षित करता है
अवधि: यह आरक्षण 15 वर्षों के लिए प्रभावी रहेगा, जिसे आगे बढ़ाया जा सकता है
SC/ST कोटा: कुल आरक्षित सीटों में से अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) की महिलाओं के लिए भी आरक्षण के भीतर उप-कोटा (उप-आरक्षण) होगा
लागू होने की प्रक्रिया: यह कानून परिसीमन (Delimitation) प्रक्रिया के बाद लागू होगा, जो नई जनगणना के आंकड़ों पर आधारित होगा
उद्देश्य: इसका उद्देश्य महिलाओं को निर्णय लेने वाली प्रक्रियाओं में समान भागीदार बनाना और नीति निर्माण में उनकी भूमिका बढ़ाना है ।
वर्तमान स्थिति: यह विधेयक संसद के दोनों सदनों से पास होकर और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद अधिनियम बन चुका है, लेकिन आगामी लोकसभा चुनाव से पहले इसे लागू करने के लिए परिसीमन की आवश्यकता है

