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Monday, April 20, 2026
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Run For Mother : विकसित भारत@2047 महिलाओं की समान भागीदारी बिना संभव नहीं

रन फॉर मदर अर्थ कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता

गुप्ता ने महिला नेतृत्व, युवा सहभागिता और पर्यावरण चेतना को ‘विकसित भारत @2047’ की आधारशिला बताया

“नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित न होना लोकतांत्रिक प्रगति के लिए खोया अवसर”–  गुप्ता

Sandhyamidday@नई दिल्ली@नारी शक्ति, जिसे हमारी परंपरा में सरस्वती, लक्ष्मी और दुर्गा के रूप में देखा जाता है, भारत की सभ्यतागत शक्ति का आधार है” यह बात दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने किंग्सवे कैंप स्थित ब्रह्मा कुमारी, शांति भवन में आयोजित “रन फॉर मदर अर्थ” के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि विकसित भारत@2047 का लक्ष्य महिलाओं की समान भागीदारी और नेतृत्व के बिना संभव नहीं है।

कार्यक्रम में उपस्थित प्रतिभागियों से संवाद करते हुए उन्होंने इस पहल को पर्यावरण जागरूकता, नागरिक उत्तरदायित्व और सामाजिक चेतना का एक सशक्त संगम बताया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के मंच युवाओं को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप जागरूक, उत्तरदायी और उद्देश्यपूर्ण भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करते हैं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवा महिलाओं की भागीदारी को उन्होंने सार्वजनिक जीवन में बढ़ती भागीदारी और नेतृत्व की दिशा में एक सकारात्मक संकेत बताया।

महिला सशक्तिकरण के संदर्भ में  गुप्ता ने संसद में हाल ही में प्रस्तुत संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026, जिसे “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” के रूप में जाना जाता है, का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इस विधेयक की प्रस्तुति महिलाओं के प्रतिनिधित्व को शासन व्यवस्था के केंद्र में लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था।

हालांकि, लोकसभा में इस विधेयक के पारित न हो पाने को उन्होंने दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए इसे महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व की दिशा में “लोकतांत्रिक प्रगति का एक काला दिन” करार दिया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को विधायी और निर्णय लेने वाली संस्थाओं में पर्याप्त प्रतिनिधित्व न मिलना संस्थागत सुधार की गति पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।

गुप्ता ने जोर देते हुए कहा कि जब तक महिलाओं को समान प्रतिनिधित्व और प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित नहीं की जाएगी, तब तक विकसित भारत @2047 का लक्ष्य अधूरा रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि महिला नेतृत्व केवल समानता का विषय नहीं, बल्कि संतुलित और प्रभावी शासन के लिए अनिवार्य आवश्यकता है।

युवा सशक्तिकरण पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि “रन फॉर मदर अर्थ” जैसे आयोजन एक जागरूक और जिम्मेदार पीढ़ी के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। विशेष रूप से युवा महिलाओं को अवसर, पहचान और नेतृत्व प्रदान करना एक सशक्त और भविष्य के लिए तैयार भारत के निर्माण की कुंजी है। उन्होंने कहा कि ऐसे मंच युवाओं में अनुशासन, आत्मविश्वास और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करते हैं।

कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को पुरस्कार भी वितरित किए गए। गुप्ता ने आयोजकों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण और युवा सहभागिता जैसे महत्वपूर्ण विषयों को एक मंच पर लाना अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार की पहलें समाज में सकारात्मक सहभागिता को बढ़ावा देंगी और एक समावेशी एवं प्रगतिशील राष्ट्र के निर्माण को सुदृढ़ करेंगी।

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