– ₹2.78 लाख करोड़ के रेलवे कैपेक्स के साथ हाई-स्पीड रेल नेटवर्क विस्तार पर सरकार का बड़ा दांव
– 350 किमी प्रति घंटे तक की रफ्तार, 2030 के बाद भारत के परिवहन की तस्वीर बदलने की तैयारी
Sandhyamidday@नई दिल्ली।देश में पहली बुलेट ट्रेन अभी पटरियों पर नहीं दौड़ी है, लेकिन केंद्र सरकार ने भविष्य के भारत का हाई-स्पीड रेल ब्लूप्रिंट तैयार कर दिया है। केंद्रीय बजट 2026-27 में सात नए हाई-स्पीड रेल (बुलेट ट्रेन) कॉरिडोर की घोषणा के बाद रेलवे मंत्रालय ने इनके लिए विस्तृत योजना पर काम तेज कर दिया है। सरकार का मानना है कि ये कॉरिडोर सिर्फ परिवहन परियोजनाएं नहीं, बल्कि देश के नए “ग्रोथ कनेक्टर” साबित होंगे।
रेलवे के इतिहास का सबसे बड़ा पूंजी निवेश
रेल बजट (सामान्य बजट का हिस्सा) में भारतीय रेलवे के लिए ₹2.78 लाख करोड़ का रिकॉर्ड पूंजीगत व्यय रखा गया है। इसमें हाई-स्पीड रेल, नई लाइनें, स्टेशन आधुनिकीकरण, माल ढुलाई और सुरक्षा परियोजनाओं पर विशेष जोर है।
करीब ₹16 लाख करोड़ का अनुमानित निवेश
सातों हाई-स्पीड कॉरिडोर पर कुल निवेश लगभग ₹16 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है। यह भारत के इतिहास की सबसे बड़ी रेल अवसंरचना योजनाओं में शामिल होगा।
ये होंगे 7 नए बुलेट ट्रेन कॉरिडोर
- दिल्ली – वाराणसी
- वाराणसी – पटना – सिलीगुड़ी
- मुंबई – पुणे
- पुणे – हैदराबाद
- हैदराबाद – बेंगलुरु
- हैदराबाद – चेन्नई
- चेन्नई – बेंगलुरु
350 किमी प्रति घंटे की रफ्तार का लक्ष्य
नई परियोजनाओं में 350 किमी प्रति घंटे तक की डिजाइन स्पीड को ध्यान में रखकर पुल, सुरंग, स्टेशन और ट्रैक तैयार किए जाएंगे। सरकार विदेशी मानकों पर निर्भरता कम कर भारतीय डिजाइन स्टैंडर्ड विकसित कर रही है, ताकि लागत घटे और निर्माण तेज हो।
हवाई यात्रा को मिलेगी चुनौती
रेल मंत्रालय का आकलन है कि 300-350 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली ट्रेनें 200 से 800 किलोमीटर के बीच हवाई यात्रा का मजबूत विकल्प बन सकती हैं। इससे एयरपोर्ट पर दबाव घटेगा और कार्बन उत्सर्जन भी कम होगा।
2030 के राष्ट्रीय रेल प्लान का हिस्सा
राष्ट्रीय रेल योजना-2030 में हाई-स्पीड रेल को भविष्य के यात्री परिवहन का महत्वपूर्ण आधार माना गया है। इसका उद्देश्य बड़े शहरों के बीच तेज, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन उपलब्ध कराना है।
पहले मुंबई-अहमदाबाद, फिर देशभर में विस्तार
508 किमी लंबा मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर निर्माणाधीन है। इसी परियोजना के अनुभव के आधार पर बाकी कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे। सरकार का लक्ष्य चरणबद्ध तरीके से देशभर में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क तैयार करना है।
बदल जाएगी आर्थिक तस्वीर
विशेषज्ञों के अनुसार इन कॉरिडोर से:
- उद्योग और निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
- टियर-2 और टियर-3 शहरों की कनेक्टिविटी मजबूत होगी।
- पर्यटन और सेवा क्षेत्र को गति मिलेगी।
- रोजगार और निर्माण क्षेत्र में लाखों अवसर पैदा होंगे।
- माल और यात्री परिवहन का दबाव अलग-अलग नेटवर्क पर बंटेगा।
अभी क्या स्थिति है?
हालांकि सात कॉरिडोर की घोषणा हो चुकी है, लेकिन अधिकांश परियोजनाएं अभी डीपीआर (Detailed Project Report), सर्वे और स्वीकृति के चरण में हैं। अंतिम रूट, स्टेशन और निर्माण की समय-सीमा प्रत्येक कॉरिडोर के लिए अलग-अलग तय होगी।

