मिडिल ईस्ट में फिर भड़का युद्ध, अमेरिका के लगातार हमलों के बाद ईरान का पलटवार; खाड़ी क्षेत्र में बढ़ा तनाव
होर्मुज और खाड़ी क्षेत्र में बढ़ी सैन्य गतिविधियां
sandhyamidday@नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में युद्ध एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिका ने लगातार आठवीं रात ईरान के सैन्य ठिकानों, तटीय निगरानी प्रणाली और एयर डिफेंस नेटवर्क पर हवाई हमले किए। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि ये कार्रवाई ईरान समर्थित हमलों में अमेरिकी सैनिकों की मौत के जवाब में की गई है।
हमलों के जवाब में ईरान ने कुवैत, जॉर्डन, बहरीन और इराक में अमेरिकी सैन्य ठिकानों की ओर मिसाइल और ड्रोन दागे। कई स्थानों पर एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय किए गए। कुछ हमलों से बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचने की खबरें हैं।
इस बीच इज़राइल ने भी चेतावनी दी है कि ईरानी हमलों का दायरा बढ़ रहा है और क्षेत्रीय सुरक्षा पर गंभीर खतरा पैदा हो गया है। लेबनान सीमा पर भी तनाव बना हुआ है।
होर्मुज बना सबसे बड़ा चिंता का केंद्र
युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। इस मार्ग पर तनाव बढ़ने से वैश्विक ऊर्जा बाजार और समुद्री व्यापार पर असर पड़ने की आशंका गहरा गई है।
भारत पर क्या होगा असर?
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के रूप में खाड़ी देशों से आयात करता है। यदि युद्ध और लंबा खिंचता है तो—
- कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है।
- पेट्रोल-डीजल और एलपीजी महंगे हो सकते हैं।
- समुद्री माल ढुलाई और बीमा लागत बढ़ सकती है।
- भारत-खाड़ी व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो सकती है।
- क्षेत्र में काम कर रहे लाखों भारतीयों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ सकती है।

