http://BJP lays out new organizational strategy for 2027-28.
New game of bjp
- यूपी में तावड़े के साथ चार सह प्रभारी, पंजाब में पूनिया की नई परीक्षा
- स्मृति ईरानी को छत्तीसगढ़-हरियाणा, बिप्लब देब को मध्यप्रदेश और संजय भाटिया को राजस्थान
- राम माधव की दो राज्यों में तैनाती, महाराष्ट्र में पांडा के साथ मालवीय समेत तीन सह प्रभारी
sandhyamidday@नईदिल्ली। भारतीय जनता पार्टी ने 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में प्रभारी-सह प्रभारी बदलकर अगले दो साल के चुनावी कैलेंडर के लिए संगठन की नई बिसात बिछा दी है। नियुक्तियों में 2027 में चुनाव वाले उत्तर प्रदेश और पंजाब के साथ 2028 में चुनाव वाले मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ पर भी वरिष्ठ नेताओं को लगाया गया है। हालांकि नियुक्तियां केवल चुनावी राज्यों तक सीमित नहीं हैं, लेकिन बड़े राज्यों में टीम का विस्तार संगठनात्मक स्तर पर विशेष तैयारी का संकेत देता है।
यूपी: तावड़े के साथ चार सह प्रभारी
सबसे बड़ा संगठनात्मक सेटअप उत्तर प्रदेश में दिखाई देता है। विनोद तावड़े प्रभारी बने रहेंगे और उनके साथ जगदीश पटेल, मेधा कुलकर्णी, प्रदीप वर्मा और अनंत ओझा को सह प्रभारी बनाया गया है। 80 लोकसभा सीटों वाले यूपी में 2027 का विधानसभा चुनाव भाजपा के लिए संगठन, सामाजिक समीकरण और बूथ प्रबंधन की बड़ी परीक्षा होगा। चार सह प्रभारियों की तैनाती से राज्य को क्षेत्रवार और संगठनात्मक स्तर पर ज्यादा निगरानी मिलने की संभावना है।
तावड़े को बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है। यानी भाजपा ने चुनाव से पहले नेतृत्व बदलने के बजाय मौजूदा केंद्रीय समन्वय को और बड़ा करने का रास्ता चुना है।
पंजाब: पूनिया के सामने अलग तरह की चुनौती
सतीश पूनिया को पंजाब के साथ जम्मू-कश्मीर की जिम्मेदारी दी गई है। पंजाब में वीरेंद्र सचदेवा और अलका गुर्जर सह प्रभारी होंगे। पंजाब में 2027 में विधानसभा चुनाव होना है। भाजपा की राज्य में संगठन विस्तार की रणनीति, सामाजिक आधार बढ़ाने और गठबंधन की संभावनाओं के बीच नई टीम की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
पूनिया का राजस्थान भाजपा संगठन का लंबा अनुभव रहा है। अब उन्हें राजस्थान से हटाकर पंजाब और जम्मू-कश्मीर जैसे अलग राजनीतिक भूगोल वाले क्षेत्रों की जिम्मेदारी देना केंद्रीय संगठन में उनके लिए नई भूमिका का संकेत है।
एमपी: बिप्लब देब की परीक्षा अभी से
मध्यप्रदेश में पूर्व त्रिपुरा मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब को प्रभारी और रेखा वर्मा को सह प्रभारी बनाया गया है। यहां अगला विधानसभा चुनाव 2028 में होगा। इसलिए तत्काल चुनाव के बजाय अगले डेढ़-दो साल में संगठन को सक्रिय रखने, सरकार और संगठन के बीच समन्वय तथा बूथ स्तर की तैयारी पर जोर रहेगा।
देब का चयन इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि उन्हें अपने गृह राज्य त्रिपुरा से बाहर बड़े हिंदीभाषी राज्य की जिम्मेदारी मिली है। यह उन्हें राष्ट्रीय संगठन में व्यापक भूमिका देने की दिशा में भी देखा जा सकता है।
राजस्थान: संजय भाटिया के सामने संगठन विस्तार
राजस्थान में संजय भाटिया को प्रभारी बनाया गया है। कविता पाटीदार और कुलजीत चहल सह प्रभारी होंगे। 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले राजस्थान में संगठन को लगातार सक्रिय रखना नई टीम की प्राथमिकताओं में रहेगा।
भाटिया की नियुक्ति का एक पहलू यह भी है कि हरियाणा से आने वाले नेता को राजस्थान जैसे दूसरे बड़े हिंदीभाषी राज्य की जिम्मेदारी दी गई है। यानी पार्टी स्थानीय नेतृत्व के साथ बाहर से आए संगठनात्मक प्रबंधकों का मिश्रण बनाए रखना चाहती है।
छत्तीसगढ़: स्मृति ईरानी की दोहरी जिम्मेदारी
स्मृति ईरानी को छत्तीसगढ़ और हरियाणा दोनों का प्रभारी बनाया गया है। छत्तीसगढ़ में सिद्धार्थ शंभू सह प्रभारी होंगे। ईरानी को राष्ट्रीय महासचिव बनाए जाने के बाद दो राज्यों की जिम्मेदारी मिलना उनके संगठनात्मक इस्तेमाल को बढ़ाने का संकेत है।
छत्तीसगढ़ में अगला विधानसभा चुनाव 2028 में है। इसलिए यहां तत्काल चुनावी अभियान से ज्यादा सरकार के काम, संगठन और सामाजिक संपर्क को चुनाव तक लगातार सक्रिय रखने की चुनौती होगी।
राम माधव की वापसी का बड़ा संदेश
राम माधव को उत्तराखंड और तमिलनाडु का प्रभार दिया गया है। उत्तराखंड 2027 में चुनाव वाला राज्य है, जबकि तमिलनाडु की राजनीति का अपना अलग सामाजिक और क्षेत्रीय ढांचा है। दो अलग राजनीतिक परिस्थितियों वाले राज्यों की जिम्मेदारी माधव को देना भाजपा के केंद्रीय संगठन में उनके अनुभव के इस्तेमाल को दिखाता है।
महाराष्ट्र में पांडा-मालवीय टीम
महाराष्ट्र में बैजयंत जय पांडा को प्रभारी और अमित मालवीय, सदानंद शेट तानावडे तथा कमलजीत सहरावत को सह प्रभारी बनाया गया है। चार सदस्यीय टीम राज्य में संगठनात्मक समन्वय को कई स्तरों पर बांटती है। खास तौर पर अमित मालवीय की वापसी को भी संगठनात्मक पुनर्संयोजन के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।
बड़े चेहरों की तैनाती का व्यापक संदेश
नई सूची में छह नेताओं को एक से ज्यादा राज्यों की जिम्मेदारी मिली है। इससे संकेत मिलता है कि भाजपा राष्ट्रीय स्तर पर अनुभवी नेताओं को राज्य संगठन और केंद्रीय नेतृत्व के बीच समन्वय की भूमिका में इस्तेमाल कर रही है। साथ ही, यूपी जैसे बड़े चुनावी राज्य में चार सह प्रभारी और महाराष्ट्र में तीन सह प्रभारी रखना यह दिखाता है कि पार्टी बड़े राज्यों में जिम्मेदारी को एक व्यक्ति तक सीमित रखने के बजाय टीम आधारित ढांचे पर जोर दे रही है।

