http://Rahul’s offer to make Gyanesh Kumar a ‘government witness’; vote theft allegations take a new turn.
- राहुल गांधी बोले—सीईसी इस्तीफा दें और कथित चुनावी साजिश की जानकारी सामने लाएं
- मोदी-शाह पर जांच की बात, 2024 लोकसभा चुनाव समेत विधानसभा चुनावों पर भी सवाल
- एसआईआर और ईवीएम को बताया कथित ‘वोट चोरी’ के हथियार
- भाजपा ने राहुल के आरोपों को राजनीतिक अभियान बताया, चुनाव आयोग के भीतर मतभेद पर भी बहस तेज
sandhyamidday@नई दिल्ली। चुनावी मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर शुरू हुआ विवाद अब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर सीधे राजनीतिक टकराव में बदल गया है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देने और कथित ‘वोट चोरी’ की साजिश में सरकारी गवाह बनने की पेशकश की। राहुल ने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े घटनाक्रम को सामने लाने के लिए ज्ञानेश कुमार को अपनी भूमिका पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
राहुल का यह बयान ऐसे समय आया है जब चुनाव आयोग के भीतर एसआईआर से जुड़े फैसलों पर दो चुनाव आयुक्तों की ओर से असहमति जताए जाने की खबरें सामने आई हैं। रिपोर्टों के अनुसार चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब दस महीनों में कई मौकों पर कुछ फैसलों और आदेशों को लेकर आपत्ति दर्ज की। हालांकि, इन घटनाक्रमों की व्याख्या को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद हैं।
राहुल ने अपने आरोपों को ‘वोट चोरी से कानून चोरी और फिर संस्था चोरी’ तक जोड़ा। उनका तर्क है कि लोकतंत्र की शुरुआत मतदाता के वोट से होती है और यदि मतदान की प्रक्रिया ही प्रभावित होती है तो उससे चुनी गई संसद, बनाए गए कानून और लोकतांत्रिक संस्थाओं की वैधता पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनावों में कथित गड़बड़ियों का आरोप भी लगाया। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि के बजाय इन्हें राहुल गांधी के राजनीतिक आरोप के रूप में देखा जाना चाहिए।
‘सरकारी गवाह’ शब्द से बढ़ा सियासी ताप
राहुल के बयान का सबसे चर्चित हिस्सा ज्ञानेश कुमार को ‘सरकारी गवाह’ यानी ‘अप्रूवर’ बनने की सलाह रहा। आपराधिक कानून की सामान्य शब्दावली में अप्रूवर वह आरोपी या अभियुक्त होता है जो अभियोजन के पक्ष में गवाही देकर किसी कथित अपराध या साजिश की जानकारी सामने लाता है। हालांकि राहुल का बयान राजनीतिक आरोप के संदर्भ में था; इससे अपने आप यह स्थापित नहीं होता कि ज्ञानेश कुमार किसी अपराध के आरोपी हैं या उनके खिलाफ कोई ऐसी कानूनी कार्यवाही चल रही है।
राहुल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की कथित ‘वोट चोरी’ में भूमिका की जांच होने की बात भी कही। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष मतदान व्यवस्था पर उठे सवालों को लेकर चुप नहीं बैठेगा।
भाजपा का जवाब भी तेज
भाजपा और उसके नेताओं ने राहुल गांधी के आरोपों को खारिज किया है। भाजपा की ओर से चुनाव आयोग को निशाना बनाए जाने को राजनीतिक अभियान बताया गया है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने भी चुनाव आयोग का बचाव करते हुए कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त अकेले फैसले नहीं लेते और आयोग को लेकर विपक्ष का अभियान राजनीतिक है।
इस पूरे विवाद में अब तीन सवाल अहम हो गए हैं—एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग के भीतर असहमति का वास्तविक दायरा क्या है, मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी है और राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ के आरोपों के समर्थन में पेश किए गए दावों की स्वतंत्र जांच किस स्तर पर होती है।

